ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार तीसरी हफ्ते सुस्ती देखने को मिल रही है और यह **$4,324** प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है। अमेरिका में बढ़ती महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है, जिसका दबाव कीमती धातुओं पर साफ दिख रहा है।
सोने की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है और यह अपने साप्ताहिक स्तर पर 2% से ज्यादा की गिरावट दर्ज कर चुका है। इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलता नज़रिया है, क्योंकि निवेशक अब और अधिक ब्याज दरों के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।
महंगाई का डेटा और फेड की उम्मीदें
बाजार की कमजोरी की मुख्य वजह अमेरिका से आए उम्मीद से बेहतर महंगाई के आंकड़े हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगस्त में अमेरिका में प्रोड्यूसर प्राइसेज में 0.4% की बढ़ोतरी हुई है। इन आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की आगामी मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना अब 70% के आसपास पहुंच गई है।
चूंकि सोने पर कोई ब्याज (Interest) नहीं मिलता, इसलिए बढ़ती ब्याज दरों के दौर में निवेशक सरकारी बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं। साथ ही, मजबूत डॉलर के कारण भी सोने की मांग में कमी आई है।
चांदी और अन्य धातुओं का हाल
चांदी का हाल सोने से भी ज्यादा खराब है, जिसमें इस हफ्ते 4% से अधिक की गिरावट आई है। कीमती धातुओं के साथ-साथ प्लैटिनम और पैलेडियम में भी कमजोरी देखी जा रही है।
भू-राजनीतिक (Geopolitical) असर
मिडिल ईस्ट में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। आमतौर पर तनाव के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन फिलहाल इससे महंगाई बढ़ रही है, जो अंततः ब्याज दरें बढ़ाने का कारण बन रही है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
भारतीय निवेशकों के लिए ग्लोबल संकेतों का असर घरेलू बुलियन मार्केट पर पड़ता है। आने वाले समय में अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का डेटा और फेड की कमेंट्री यह तय करेगी कि सोने की चाल में आगे क्या बदलाव आएगा।
