सोने की 'सुरक्षित निवेश' वाली इमेज पर बड़ा इम्तेहान
सोने की 'सुरक्षित निवेश' (safe-haven) की पारंपरिक भूमिका पर आजकल बड़ा इम्तेहान चल रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है। यह उस स्थिति के विपरीत है जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर सोने को हमेशा मजबूती मिली है। हाल ही में 27 मार्च 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी के सोने के फ्यूचर ₹1.41 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब कारोबार कर रहे थे, जो हाल की गिरावट का असर दिखाता है।
महंगाई का डर और ब्याज दरों का स्थिर रहना, भू-राजनीति पर भारी
सोने की 'सुरक्षित निवेश' वाली अपील के कम होने का मुख्य कारण लगातार बढ़ती महंगाई (inflation) का डर है। खासकर कच्चे तेल (crude oil) की ऊंची कीमतों ने दुनिया भर में इस चिंता को बढ़ाया है, जिसके चलते सेंट्रल बैंक (central banks) ब्याज दरें (interest rates) घटाने से कतरा रहे हैं। फरवरी 2026 में अमेरिका की सालाना महंगाई 2.4% पर स्थिर रही, जबकि कोर इन्फ्लेशन 2.5% था। हालांकि यह फेडरल रिजर्व के लक्ष्य से थोड़ा कम है, लेकिन ऊर्जा कीमतों से बढ़ने वाले महंगाई के जोखिम के कारण रेट कट्स (rate cuts) की उम्मीदें टल रही हैं। CME FedWatch टूल के अनुसार, अप्रैल 2026 में फेडरल रिजर्व द्वारा दरों को स्थिर रखने की 91.7% से 94.8% संभावना है, वहीं दरें बढ़ने की थोड़ी सी ही गुंजाइश दिख रही है।
मजबूत होता डॉलर सोने के लिए और मुसीबत
सोने पर एक और दबाव अमेरिकी डॉलर (U.S. dollar) की मजबूती से आ रहा है, जो एक बार फिर 'सुरक्षित निवेश' के तौर पर उभर रहा है। डॉलर इंडेक्स (DXY) 100.2105 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से लगभग 2% बढ़ा है। ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों के कारण डॉलर में यह मजबूती देखी जा रही है, जो निवेशकों को ज्यादा रिटर्न का वादा करती है। सोने के लिए, मजबूत डॉलर अक्सर एक बाधा का काम करता है, क्योंकि यह अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए धातु को महंगा बना देता है।
क्यों नहीं मिल रहा सोने को तनाव का फायदा?
मौजूदा मार्केट सेंटीमेंट (market sentiment) में, निवेशक सोने जैसी नॉन-इंटरेस्ट बियरिंग एसेट्स के बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों (assets) को प्राथमिकता दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इस उच्च-दर वाले माहौल में सोने को 'सेफ-हेवन' मांग का फायदा नहीं मिल पा रहा है। हाल की बिकवाली को रेट हाइक (rate hike) की उम्मीदों के आधार पर पोजीशन लिक्विडेट करने वाले ट्रेडर्स से जोड़ा जा रहा है। हालांकि कुछ लोग सोने को लंबी अवधि के लिए महंगाई से बचाव (inflation hedge) मानते हैं, लेकिन इसका अल्पकालिक प्रदर्शन मॉनेटरी पॉलिसी (monetary policy) और करेंसी मूवमेंट (currency movements) से काफी प्रभावित होता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (European Central Bank) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) ने भी अपनी दरों को स्थिर रखा है। ECB ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण 2026 के लिए अपनी महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 2.6% कर दिया, जबकि BoE ने आयातित महंगाई की चिंताओं के बीच अपनी दर 3.75% पर बनाए रखी।
सोने की कीमतों का अगला कदम क्या?
ING के कमोडिटी स्ट्रेटेजिस्ट (commodities strategists) फेडरल रिजर्व की पॉलिसी, करेंसी के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति सोने की संवेदनशीलता की ओर इशारा करते हैं, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि कुछ विश्लेषक लंबी अवधि में सोने की मांग को देखते हुए इसे $5,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन वर्तमान मूल्य रुझान बताते हैं कि बाजार अपनी उम्मीदों को समायोजित कर रहे हैं। निवेशक तेजी से अपने पोर्टफोलियो को व्यवस्थित कर रहे हैं, सोने और ऊर्जा जैसी वास्तविक संपत्तियों को पसंद कर रहे हैं लेकिन उच्च यील्ड (yield) या डॉलर की सापेक्ष सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का रुख और महंगाई पर सेंट्रल बैंकों की प्रतिक्रियाएं सोने की अल्पकालिक दिशा के लिए प्रमुख कारक होंगी।