सोने की कीमतों में अगस्त के ऊपरी स्तरों से करीब **9%** की गिरावट आई है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच फेडरल रिजर्व द्वारा दरें बढ़ाने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर MCX पर दिख रहा है।
सोने पर बढ़ता दबाव
सोने की चमक पिछले कुछ समय से फीकी पड़ती दिख रही है। अगस्त के अंत में $4,700 के करीब रहने वाले सोने के भाव अब फिसलकर $4,300 के नीचे आ गए हैं। इस गिरावट के पीछे ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट में आया बड़ा बदलाव है।
क्यों गिर रहे हैं भाव?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता है। बाजार में इस बात की 70% संभावना जताई जा रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस महीने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो गोल्ड जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट की मांग घट जाती है। इसके अलावा, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 4.8% तक पहुंच जाना निवेशकों के लिए गोल्ड से ज्यादा आकर्षक विकल्प बन गया है।
साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, जिससे महंगाई का डर फिर से हावी हो गया है।
टेक्निकल और भारतीय बाजार की स्थिति
टेक्निकल तौर पर सोना अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है, जो एक 'बेयरिश' संकेत है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गिरावट जारी रही, तो सोना $4,100 के सपोर्ट लेवल की ओर जा सकता है।
वहीं, भारत में इसका सीधा असर Multi Commodity Exchange (MCX) पर दिख रहा है, जहां अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहे हैं। अब निवेशकों की नजरें अमेरिकी लेबर मार्केट की रिपोर्ट्स पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय करेंगी।
