गोल्ड की कीमतों में आज जोरदार गिरावट देखी गई है, जहां यह **$4,146.51** प्रति औंस पर आ गया है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशक सोने से पैसा निकालकर सुरक्षित बॉन्ड की ओर रुख कर रहे हैं।
सोने की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे भाव 3.3% टूटकर $4,146.51 प्रति औंस के स्तर पर आ गया। पिछले 7 हफ्तों में यह सोने के लिए एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। बाजार में चल रही उथल-पुथल के बीच निवेशक अब उन एसेट्स की तरफ भाग रहे हैं जहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिल रहा है।
क्यों घटी सोने की चमक?
इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स (Treasury yields) पर बढ़ता रिटर्न है। ऑयल प्राइसेस में तेजी के कारण महंगाई का डर बढ़ा है, जिससे डॉलर और बॉन्ड यील्ड दोनों ऊपर जा रहे हैं। चूंकि सोने पर कोई फिक्स्ड इंटरेस्ट या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए निवेशक अब बॉन्ड्स को तरजीह दे रहे हैं। इसका सीधा असर नॉर्थ अमेरिकन ईटीएफ (ETFs) पर पड़ा है, जिनसे हाल ही में $13 बिलियन का आउटफ्लो देखा गया है।
भारत और सेंट्रल बैंक दे रहे सहारा
पश्चिमी बाजारों में भले ही बिकवाली हो, लेकिन भारत में रुझान अलग है। पहली तिमाही में भारतीय गोल्ड ईटीएफ में 20 टन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया, जो वैश्विक मांग का लगभग 32% है। इसके अलावा, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन सोना खरीदा, जो पिछले साल के मुकाबले 62% ज्यादा है। खास तौर पर पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने लगातार 20 महीनों से अपने रिजर्व में सोना जोड़ा है, जो कीमतों के लिए एक मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है।
आगे क्या उम्मीद है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट फेडरल रिजर्व की इंटरेस्ट रेट पॉलिसी का असर है, न कि सोने की फंडामेंटल वैल्यू में कमी। BMO कैपिटल मार्केट्स ने गोल्ड का शॉर्ट-टर्म टारगेट $4,650 प्रति औंस तय किया है। निवेशकों को आने वाले दिनों में अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के फैसलों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है।
