अमेरिकी डॉलर के फिर से मजबूत होने का असर आज भारतीय सोने की कीमतों पर साफ दिखा, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिली।
डॉलर की ताकत और फेड की पॉलिसी का असर
आज, 30 जनवरी 2026 को, US डॉलर इंडेक्स (DXY) में 0.40% की बढ़त देखी गई, जिससे यह 96.5480 के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर के मजबूत होने से दूसरे देशों की करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, इसलिए इसकी डिमांड पर असर पड़ता है। इसके साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर भी बाजार में अटकलें तेज हो गई हैं। मई 2026 में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल के पद छोड़ने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नए उत्तराधिकारी की नियुक्ति की उम्मीदों के बीच, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नेतृत्व कम 'डॉविश' (Dovish) रुख अपना सकता है। जनवरी 2026 की अपनी मीटिंग में फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को 3.5%-3.75% की रेंज में बनाए रखा था, लेकिन कुछ अधिकारियों ने रेट कट की वकालत की थी। यह अनिश्चितता सोने जैसी कीमती धातुओं के लिए अस्थिर माहौल बना रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय तुलना
हालांकि, कीमतों में इस गिरावट के बावजूद, बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने सोने की 'सेफ-हेवन' (Safe-haven) अपील को बनाए रखा है। राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा टैरिफ (Tariff) को लेकर दी गई धमकियां और अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव जैसे मुद्दे सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मांग को बढ़ा रहे हैं। यह निरंतर मांग कीमतों को बहुत ज्यादा गिरने से रोके हुए है।
इसके अलावा, भारतीय सर्राफा बाजार में सोना अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में प्रीमियम पर बिक रहा है। 30 जनवरी 2026 को भारत में 24K सोने का भाव 10 ग्राम के लिए ₹167,360 था, जो दुबई के मुकाबले लगभग 3.98% महंगा था (दुबई में ₹160,959)। यह प्रीमियम भारत में इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty), गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) और बाजार की अलग-अलग गतिशीलता जैसे कारकों से प्रभावित है, जबकि दुबई को टैक्स-फ्री नीतियों और कम इंपोर्ट ड्यूटी का फायदा मिलता है। भारत का गोल्ड मार्केट काफी बड़ा है, जो वैश्विक मार्केट का लगभग 15% हिस्सा है, जिसका मूल्य $23 ट्रिलियन है। 2026 में भारत में सोने की मांग 600-700 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।
भविष्य का अनुमान
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में अमेरिकी डॉलर में रिकवरी जारी रहने के कारण सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं। लेकिन, सोने का दीर्घकालिक नजरिया मजबूत बना हुआ है। विशेषज्ञों को अमेरिका में निरंतर भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण सोने की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, हालिया ठहराव के बावजूद, 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर कटौती (Interest Rate Cut) की बढ़ती उम्मीदें भी सोने के लिए सपोर्टिव फैक्टर मानी जा रही हैं। ऐतिहासिक रूप से, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती के बाद सोने में तेजी देखी गई है, क्योंकि निवेशक आर्थिक अनिश्चितता और संभावित करेंसी डीबेसमेंट (Currency Debasement) के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश करते हैं। हाल के वर्षों में सेंट्रल बैंकों (Central Banks) द्वारा की जा रही रणनीतिक खरीदारी (Strategic Buying) भी कीमती धातु की अंतर्निहित मांग (Underlying Demand) को बढ़ा रही है, जिससे यह ब्याज दरों और वास्तविक यील्ड (Real Yields) के साथ अपने पारंपरिक संबंध को बदल रही है।