ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतों में **0.4%** की गिरावट आई है। अमेरिका के ताजा इन्फ्लेशन डेटा ने दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को बढ़ाकर **75%** कर दिया है, जिससे गोल्ड पर दबाव बन गया है।
सोने में गिरावट की वजह
ग्लोबल मार्केट में सोने के दाम 0.4% घटकर $4,006.06 प्रति औंस पर आ गए हैं। इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका के सितंबर के इन्फ्लेशन आंकड़े हैं, जो उम्मीद से ज्यादा रहे हैं। गैसोलीन जैसी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों के कारण वहां का कंज्यूमर इन्फ्लेशन बढ़ गया है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ गया है।
फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का गणित
बाजार अब पूरी तरह से फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के फैसलों पर नजर गड़ाए बैठा है। CME FedWatch Tool के अनुसार, अब इस बात की 75% संभावना है कि दिसंबर की मीटिंग में अमेरिकी सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
गोल्ड क्यों हुआ कमजोर?
गोल्ड एक नॉन-यील्डिंग एसेट है, यानी इस पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता। जब अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सरकारी बॉन्ड्स (Government Bonds) जैसे निवेश ज्यादा आकर्षक लगने लगते हैं क्योंकि वहां गारंटीड रिटर्न मिलता है। इसके अलावा, डॉलर के मजबूत होने से भी गोल्ड की डिमांड पर असर पड़ता है, क्योंकि डॉलर महंगा होने पर अन्य करेंसी वाले खरीदारों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। यह लगातार दूसरा महीना है जब गोल्ड में गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय निवेशकों के लिए संकेत
भारतीय मार्केट के लिए भी ये ग्लोबल संकेत अहम हैं। हालांकि घरेलू स्तर पर डिमांड और रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट का भी असर पड़ता है, लेकिन ग्लोबल स्तर पर गोल्ड का डाउनट्रेंड स्थानीय बुलियन प्राइसेज पर भी दबाव डालता है। अभी के माहौल में जब तक मॉनेटरी पॉलिसी सख्त रहेगी, सोने में बड़ी रिकवरी की उम्मीद कम है।
