मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच, भारत में 2 मार्च, 2026 को Gold की कीमतों में आई गिरावट ने बाज़ार को हैरान कर दिया है। आम तौर पर, वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निवेशक Gold को एक सुरक्षित पनाह (Safe-Haven) मानते हुए इसमें निवेश करते हैं, जिससे इसकी कीमतें आसमान छूने लगती हैं। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग थी।
जहां एक ओर वैश्विक बाज़ार में COMEX पर Gold फ्यूचर्स (Futures) लगभग $5,400 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गए, वहीं भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 24-कैरेट Gold की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दिल्ली में 24-कैरेट Gold ₹2,570 गिरकर ₹1,70,660 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
इस गिरावट के ट्रेंड से अलग, बेंगलुरु में 24-कैरेट Gold में ₹1,800 की बढ़ोतरी हुई और यह ₹1,70,510 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इसके विपरीत, Silver, जो कि Gold की तरह ही एक Safe-Haven एसेट है, में करीब 2.5% से 2.6% की मजबूती देखी गई।
भारतीय रुपया (Indian Rupee) भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर लगभग 91.55 पर था। आमतौर पर, रुपये के कमजोर होने से Gold की आयात लागत बढ़ती है और कीमतें ऊपर जानी चाहिए। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ, जिससे यह साफ संकेत मिला कि घरेलू बाज़ार में बिकवाली का दबाव वैश्विक संकेतों पर हावी हो रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ऊंचे भावों के कारण भारतीय उपभोक्ता Gold की खरीद को लेकर अधिक संवेदनशील हो गए हैं। ज्वैलरी की मांग पर इसका असर दिख रहा है, क्योंकि लोग या तो छोटी मात्रा में खरीद रहे हैं या पुराने Gold को एक्सचेंज कर रहे हैं। ऐसे में, दूर के भू-राजनीतिक संकटों के बजाय, घरेलू स्तर पर कीमत की सामर्थ्य (affordability) एक बड़ा कारक बन गई है।
हालांकि, लंबी अवधि के लिए, Motilal Oswal Financial Services जैसे विश्लेषकों ने Gold की कीमतों के $6,000 प्रति औंस या घरेलू स्तर पर ₹1.85 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। लेकिन 2 मार्च के दिन की चाल ने स्पष्ट कर दिया है कि अल्पकालिक (short-term) तौर पर, स्थानीय मांग की स्थिति और आर्थिक भावनाएं (economic sentiment) वैश्विक जोखिमों पर हावी हो सकती हैं।