आज मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव **₹1.42 लाख** प्रति 10 ग्राम के नीचे आ गए। यह गिरावट वैश्विक बाजार के रुझानों और अमेरिकी मुद्रास्फीति की उम्मीदों में बदलाव का नतीजा है। निवेशक महंगाई के आंकड़ों में नरमी को बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक जोखिमों के साथ संतुलित कर रहे हैं, जो कीमती धातुओं की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
MCX पर सोने में गिरावट का दौर
इस बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई। अगस्त डिलीवरी के लिए सोने का वायदा भाव ₹1.42 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया। यह कॉन्ट्रैक्ट ₹983, यानी करीब 0.69% की गिरावट के साथ ट्रेड हुआ, और ट्रेडिंग वॉल्यूम 1,289 लॉट रहा। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजारों में आई नरमी के अनुरूप है, जहां COMEX गोल्ड $4,045.80 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो 0.59% की कमी दर्शाता है।
महंगाई और बाजार पर इसका असर
हालिया गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी आर्थिक रिपोर्ट है, जिसमें जून के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (consumer price index) में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई। कोर इन्फ्लेशन (core inflation) घटकर 2.6% पर आने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) द्वारा ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गई हैं। हालांकि, आमतौर पर कम ब्याज दरें सोने जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट (non-yielding asset) के लिए फायदेमंद होती हैं, लेकिन फिलहाल यह धातु जटिल परिस्थितियों का सामना कर रही है।
कच्चे तेल का बढ़ता दबाव
अमेरिकी महंगाई भले ही नरम पड़ती दिख रही हो, लेकिन निवेशक एनर्जी सेक्टर के जोखिमों को भी तौल रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। यह कारक अक्सर महंगाई के जोखिम को बढ़ा देता है। उपभोक्ता मूल्य डेटा में नरमी और ऊर्जा लागत में संभावित वृद्धि के बीच यह खींचतान की स्थिति कीमती धातुओं के लिए एक सतर्क माहौल बना रही है।
तकनीकी पहलू और आगे की राह
तकनीकी तौर पर, कीमतों में यह उतार-चढ़ाव बिकवाली के निरंतर दबाव को दर्शाता है। 21-दिन और 55-दिन जैसे प्रमुख मूविंग एवरेज (moving averages) के नीचे कारोबार करने से पता चलता है कि मौजूदा रुझान दबाव में है। कमोडिटीज मार्केट को ट्रैक करने वाले ट्रेडर्स और निवेशकों के लिए, वैश्विक भावना में बदलाव के बीच इन तकनीकी स्तरों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
आगे चलकर, कीमती धातुओं की कीमतों के लिए मुख्य निगरानी बिंदु अमेरिकी आर्थिक संकेतक और फेडरल रिजर्व की आधिकारिक टिप्पणियां होंगी। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति में कोई भी बड़ा बदलाव एक महत्वपूर्ण कारक बना रहेगा, क्योंकि ये घटनाक्रम अक्सर कच्चे तेल की कीमतों और इसके परिणामस्वरूप, महंगाई के बचाव के तौर पर सोने की मांग को प्रभावित करते हैं। यह धातु समर्थन का नया आधार बनाती है या अपनी वर्तमान गिरावट की राह जारी रखती है, यह निर्धारित करने के लिए बाजार प्रतिभागी मूल्य रुझानों की निरंतरता पर भी नजर रखेंगे।
