बुधवार को सोने की कीमतों में नरमी आई और यह **$4,035.67** प्रति औंस पर आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की नई चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे सोने की हालिया बढ़त पर भी ब्रेक लग गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीन दिनों से तेजी देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण ईरान से जुड़े बंदरगाहों और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव हैं। सोने जैसे कीमती धातुओं के निवेशकों के लिए, तेल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर महंगाई का जोखिम पैदा करती हैं। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए जब महंगाई बढ़ने की उम्मीद होती है तो यह निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाता है। ऐसे माहौल में केंद्रीय बैंक अक्सर ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखते हैं।
फेडरल रिजर्व की नीति काOutlook
हालांकि जून के अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई के आंकड़ों ने उम्मीद से थोड़ी राहत दी है, लेकिन फेडरल रिजर्व अभी भी सतर्क है। अधिकारियों का कहना है कि महंगाई के कम होने के लगातार संकेत मिलने के बाद ही वे ब्याज दरों को लेकर नरमी बरतेंगे। अब बाजार आगामी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, ताकि यह पता चल सके कि कीमतों का दबाव वाकई कम हो रहा है या नहीं।
बाजार प्रतिभागी अभी से भविष्य की रेट हाइक की उम्मीदों को एडजस्ट कर रहे हैं। CME FedWatch Tool के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना घटकर लगभग 58% रह गई है, जो कि हालिया महंगाई के आंकड़ों से पहले 76% थी। वहीं, दिसंबर तक दरें बढ़ने की उम्मीद करीब 80% पर बनी हुई है। इससे पता चलता है कि अल्पावधि में दरें बढ़ाने का तात्कालिक दबाव भले ही कम हुआ हो, लेकिन निवेशकों को अभी भी साल के अंत तक मौद्रिक नीति के मोर्चे पर एक मुश्किल राह की उम्मीद है।
अन्य कीमती धातुओं में भी मिला-जुला प्रदर्शन देखा गया। स्पॉट सिल्वर 0.3% गिरकर $58.48 प्रति औंस रहा, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में 0.2% की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जो क्रमशः $1,635.56 और $1,307.11 पर पहुंच गए। निवेशक अमेरिकी डॉलर की दिशा और ब्याज दरों के रुझान का अंदाजा लगाने के लिए कच्चे तेल की कीमतों की स्थिरता और अमेरिकी आर्थिक रिपोर्टों पर नजर रखना जारी रखेंगे।
