अगस्त के उच्चतम स्तर से सोने की कीमतें **7.11%** गिरकर **$4,327** प्रति औंस के करीब आ गई हैं। हालांकि, इंटरनेशनल मार्केट में नरमी के बावजूद भारतीय निवेशक सतर्कता के साथ खरीदारी कर रहे हैं, जिसका सबूत अगस्त में गोल्ड ETFs में **67%** का उछाल है।
गिरावट की असली वजह
सोने की कीमतें 25 अगस्त के $4,658 के हाई लेवल से फिसलकर अब $4,327 के आसपास कारोबार कर रही हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और डॉलर की मजबूती के कारण गोल्ड पर दबाव बढ़ा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना, जिस पर कोई ब्याज (Interest) नहीं मिलता, निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाता है।
ग्लोबल मार्केट और फेड का असर
फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को 3.75% से 4.00% तक बढ़ाने का असर सोने पर साफ दिख रहा है। अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक रहने के कारण बुलियन मार्केट में अस्थिरता बनी हुई है। Motilal Oswal Financial Services के एनालिस्ट्स का मानना है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से ब्याज दरों पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन निवेशकों की नजरें अभी भी यूएस ट्रेजरी यील्ड्स (US Treasury Yields) पर टिकी हैं।
भारत में सोने की मांग
इंटरनेशनल मार्केट के उलट, भारत में निवेशकों का उत्साह बरकरार है। अगस्त में गोल्ड ETFs में ₹26 बिलियन का निवेश आया, जो 67% की बढ़ोतरी दर्शाता है। इसके अलावा, डिजिटल गोल्ड में भी हर महीने ₹25 बिलियन का निवेश हो रहा है।
हालांकि, भारत में 15% की इंपोर्ट ड्यूटी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। ज्वेलर्स फिलहाल नया स्टॉक लेने से बच रहे हैं क्योंकि बाजार में पुराना रिसाइकिल सोना ज्यादा उपलब्ध है। अब सबकी निगाहें दशहरे और दिवाली पर टिकी हैं। अगर कीमतें ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी रहती हैं, तो होलसेलर्स को बाजार में फिर से तेजी की उम्मीद है।
