12 जून 2026 को भारत में सोने की कीमतों में **0.50%** का उछाल आया, 24K गोल्ड **₹150,010** प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बावजूद, ग्लोबल महंगाई और एनर्जी की बढ़ती कीमतें सोने को सुरक्षित निवेश का दर्जा दे रही हैं।
क्या हुआ?
12 जून 2026 को भारत में सोने की कीमतों में 0.50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 24-कैरेट सोने का भाव ₹150,010 प्रति 10 ग्राम हो गया, जो पिछले बंद भाव से ₹740 ज्यादा है। इसी तरह, 22-कैरेट सोना ₹137,509 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। प्रमुख शहरों में स्थानीय टैक्स और मेकिंग चार्जेज के कारण कीमतों में मामूली अंतर देखा गया। दिल्ली में 24K सोने का भाव ₹149,750 और चेन्नई में ₹150,440 रहा।
निवेशकों के लिए क्यों है खास?
सोना पारंपरिक रूप से महंगाई (Inflation) के खिलाफ एक हेज (Hedge) माना जाता है। भले ही मजबूत अमेरिकी डॉलर सोने को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए महंगा बनाता है, लेकिन भारत में घरेलू सोने की कीमतें फिलहाल एनर्जी की ऊंची कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से समर्थन प्राप्त कर रही हैं। निवेशकों के लिए, यह उछाल बाजार की उस भावना को दर्शाता है जो अस्थिरता के समय सोने को एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में महत्व देना जारी रखती है, खासकर जब महंगाई एक चिंता का विषय बनी हुई है।
कीमतों में अंतर
निवेशकों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों के बीच के बड़े अंतर पर ध्यान देना चाहिए। 12 जून 2026 को भारत में 24K सोने का भाव ₹150,010 प्रति 10 ग्राम था, जो दुबई के भाव ₹132,623 से काफी ज्यादा है। यह ₹17,387 का अंतर, यानी लगभग 13.11% का प्रीमियम, मुख्य रूप से भारत की इंपोर्ट ड्यूटी और स्थानीय टैक्स की वजह से है। यह प्रीमियम फिजिकल गोल्ड खरीदने की लागत पर विचार करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
किन बातों पर रहेगी नजर?
सोने की कीमतें फिलहाल वैश्विक शक्तियों के बीच फंसी हुई हैं। एक तरफ, अमेरिका का फेडरल रिजर्व मई के लिए अनुमान से बेहतर आए प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) डेटा के जवाब में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी का संकेत दे सकता है, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है और सोने की मांग कम हो सकती है। दूसरी तरफ, एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जो महंगाई को बढ़ा रही हैं और सोने में दिलचस्पी बनाए हुए हैं। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच तेल को लेकर कूटनीतिक चर्चाओं में कोई भी प्रगति एनर्जी की कीमतों को प्रभावित कर सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष असर सोने पर पड़ेगा।
सोने के लिए जोखिम
बाजार में एक रेंज-बाउंड (Range-bound) स्थिति का जोखिम है, जहां कीमतें ऊपर जाने के बजाय स्थिर रह सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अगर वैश्विक बाजार का रुख कमजोर रहता है तो MCX अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स (MCX August gold futures) जैसे घरेलू फ्यूचर्स में गिरावट आ सकती है। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर एक प्राथमिक जोखिम बना हुआ है, क्योंकि यह डॉलर- the-denominated एसेट्स को नॉन-यील्डिंग एसेट्स जैसे सोने की तुलना में अधिक आकर्षक बनाता है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निवेशक संभावित मूल्य आंदोलनों को समझने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर नजर रख सकते हैं। पहला, ब्याज दरों के संबंध में US Federal Reserve के संकेतों को ट्रैक करें, क्योंकि उच्च दरें सोने से पूंजी खींच सकती हैं। दूसरा, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक (Geopolitical) अपडेट्स पर नजर रखें, जो सुरक्षित-संपत्ति की मांग में त्वरित बदलाव ला सकते हैं। अंत में, घरेलू इंपोर्ट ड्यूटी या व्यापार नीतियों पर किसी भी अपडेट पर नजर रखें, क्योंकि ये सीधे भारतीय बाजार में सोने की लागत तय करते हैं।
