सोने की कीमतों में रिकवरी देखने को मिली है और यह **$3,908** प्रति औंस के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। हाल ही में कीमतें एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन वैश्विक तनाव ने इसे सपोर्ट दिया है।
लिक्विडेशन और बाजार का दबाव
सोने में आई हालिया गिरावट के पीछे ग्लोबल शेयर बाजारों में भारी बिकवाली मुख्य वजह रही है। जब शेयर बाजार गिरते हैं, तो निवेशकों को मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में कैश जुटाने के लिए निवेशक सोने जैसी लिक्विड एसेट बेच देते हैं। इसी जबरन बिकवाली यानी 'लिक्विडेशन' के कारण सोने की कीमतें $4,000 के अहम लेवल से नीचे फिसल गई थीं।
भू-राजनीतिक चिंताएं बनाम ब्याज दरें
बाजार का सेंटीमेंट फिलहाल दो तरफा है। मिडिल ईस्ट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानकर इसमें खरीदारी कर रहे हैं, जिससे कीमतों को एक बेस (Floor) मिला है।
हालांकि, कीमतों में तेजी US Federal Reserve की पॉलिसी के कारण सीमित हो सकती है। महंगाई को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं और फेडरल रिजर्व के रुख को देखते हुए दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 75% के करीब है। सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों का रुझान बॉन्ड्स की ओर अधिक हो जाता है।
घरेलू बाजार पर असर
भारतीय बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर भी इन वैश्विक रुझानों का सीधा असर दिखा। यहां घरेलू वायदा कारोबार मिला-जुला रहा, जहां ट्रेडर्स ग्लोबल प्राइस मूवमेंट और स्थानीय मांग के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों पर बाजार की पैनी नजर होगी, जो गोल्ड की दिशा तय करेंगे।
