सोने के भाव में क्यों आई इतनी तेजी?
घरेलू बाजार में सोने के दाम में 1.97% की उछाल आई है, जो जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और करेंसी की चाल को दर्शाती है। हालांकि, यह तेजी अल्पावधि के लिए है। अभी निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीद रहे हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म में इसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
डॉलर और RBI का बढ़ता दबाव
सोने की कीमतों पर मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का दबाव साफ दिख रहा है। ऐतिहासिक तौर पर, जब डॉलर मजबूत होता है तो डॉलर-डिनॉमिनेटेड एसेट्स (जैसे सोना) पर दबाव आता है।
साथ ही, 5 जून को होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग पर सबकी नजरें हैं। अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत देता है, तो निवेशकों का रुझान नॉन-यील्डिंग एसेट्स (जैसे सोना) से हटकर अन्य जगहों पर जा सकता है, जिससे सोने की कीमतों में आई तेजी खत्म हो सकती है।
क्यों आ सकती है सोने में गिरावट?
तकनीकी तौर पर सोना एक रेजिस्टेंस जोन (Resistance Zone) में पहुंच गया है, जहां से इसमें गिरावट आ सकती है। भारत में फिजिकल गोल्ड की डिमांड में कमी दिख रही है, क्योंकि डोमेस्टिक प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के मुकाबले कम हो रहा है।
मजबूत डॉलर सोने की कीमतों के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है, जिससे उभरते बाजारों में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी की गुंजाइश कम हो गई है। इसके अलावा, इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) को लेकर सरकारी नियमों का जोखिम भी बना हुआ है, जो घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या?
बाजार की नजरें अब MCX पर ₹1,55,000 के सपोर्ट लेवल पर टिकी हैं। RBI की पॉलिसी घोषणा से पहले बाजार में सीमित दायरे में कारोबार की उम्मीद है। वैश्विक केंद्रीय बैंक जहां सख्त मौद्रिक नीति अपना रहे हैं, वहीं सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स को रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ गई है। ऐसे में, RBI का लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) और डॉलर इंडेक्स की चाल यह तय करेगी कि सोने की कीमतें नई ऊंचाई बनाएंगी या फिर एक बड़ी गिरावट का सामना करेंगी।
