धनतेरस 2027 को लेकर बाजार के जानकारों के बीच सोने की कीमतों पर बहस छिड़ी है। कुछ एक्सपर्ट्स **30-40%** तक उछाल की उम्मीद जता रहे हैं, तो कुछ **20-25%** की बढ़त को लेकर सतर्क हैं। फिलहाल सोने का भाव **₹1,46,000** प्रति 10 ग्राम के आसपास है।
सोने की चाल को लेकर मार्केट में इस वक्त दो राय देखने को मिल रही है। साल 2026 की शुरुआत में सोने के दाम ₹1,80,000 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे, लेकिन उसके बाद आई गिरावट के बाद अब निवेशक सतर्क हैं। हालांकि, अब कुछ रिसर्च डेस्क का मानना है कि सोने में 30-40% की बड़ी रैली आ सकती है, जबकि कुछ अन्य विश्लेषक इसे 20-25% तक सीमित मान रहे हैं।
तेजी के पीछे के बड़े फैक्टर
गोल्ड की कीमतों का भविष्य काफी हद तक US Federal Reserve की पॉलिसी पर निर्भर है। अगर ब्याज दरों में कटौती होती है, तो US Treasury Yields कम हो सकती हैं, जिससे सोने के प्रति आकर्षण बढ़ेगा। इसके अलावा, ग्लोबल स्तर पर सेंट्रल बैंक की लगातार खरीदारी और जियोपॉलिटिकल अस्थिरता सोने को मजबूती दे रही है। भारत के लिए USD-INR की चाल भी काफी अहम है, क्योंकि मुद्रा में उतार-चढ़ाव से आयात महंगा या सस्ता हो जाता है।
पोर्टफोलियो में कितनी जगह दें?
फाइनेंशियल प्लानर्स का मानना है कि सोने को केवल एक हैजिंग टूल (Hedge) की तरह देखना चाहिए, न कि सट्टेबाजी के लिए। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने कुल पोर्टफोलियो का 15-20% से ज्यादा हिस्सा सोने में न रखें। फिजिकल गोल्ड के मुकाबले Gold ETFs और Sovereign Gold Bonds को निवेश के लिए ज्यादा बेहतर माना जा रहा है क्योंकि इनमें मेकिंग चार्जेस और स्टोरेज का झंझट नहीं होता।
निवेश में जोखिम भी हैं
सोने को लेकर बुलिश होने के साथ-साथ कुछ रिस्क भी हैं। अगर महंगाई के आंकड़े ऊंचे बने रहते हैं, तो सेंट्रल बैंक दरों में कटौती टाल सकते हैं, जो सोने के भाव पर दबाव डाल सकता है। साथ ही, अगर अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य करेंसी में गोल्ड की डिमांड कम हो सकती है। निवेशकों को आने वाले महंगाई आंकड़ों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
