अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों के बाद सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है और यह दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गया है। इससे फेडरल रिजर्व (US Central Bank) द्वारा तत्काल ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। जहां सोने को फायदा हो रहा है, वहीं चांदी में मामूली गिरावट आई है। निवेशक अब फेडरल रिजर्व की अगली चाल को समझने के लिए प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़ों पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
क्यों चढ़ रहे हैं सोने के दाम?
गुरुवार को सोने की कीमतों में नरमी का रुख देखा गया, जो पिछले दो महीनों में सबसे ज्यादा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि निवेशकों ने अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अपनी उम्मीदों में बदलाव किया है। जुलाई के लिए अमेरिका के महंगाई (Inflation) के आंकड़े आने के बाद यह तेजी आई है। इन आंकड़ों में 0.1% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जो बाजार के अनुमानों के मुताबिक ही थी। इस डेटा से निवेशकों को राहत मिली है, जिन्हें डर था कि फेडरल रिजर्व सितंबर की मीटिंग में ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी कर सकता है।
ब्याज दरों पर क्या है बाजार का अनुमान?
फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नजर रखने वाले मार्केट टूल्स के अनुसार, सितंबर में दरें बढ़ने की संभावना घटकर अब 40% रह गई है, जो महंगाई के आंकड़ों से पहले 46% थी। आमतौर पर, जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होती हैं या स्थिर रहती हैं, तो सोना निवेशकों के लिए बेहतर साबित होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोना कोई रेगुलर ब्याज नहीं देता, इसलिए जब ब्याज दरें तेजी से नहीं बढ़ रही होतीं, तो यह बॉन्ड या सेविंग अकाउंट की तुलना में ज्यादा आकर्षक निवेश बन जाता है।
चांदी और भू-राजनीतिक तनाव का असर
जहां एक तरफ सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, वहीं दूसरी तरफ चांदी की कीमतों में गुरुवार को थोड़ी गिरावट देखने को मिली। इस महीने की शुरुआत में चांदी ने अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन हालिया बढ़त के बाद कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं। कीमती धातुओं पर भू-राजनीतिक तनाव का भी असर पड़ता है, खासकर मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्षों और शिपिंग मार्गों को लेकर। ये अनिश्चितताएं अक्सर निवेशकों को सोने जैसे सुरक्षित निवेश की ओर खींचती हैं, जिससे कीमतों को और सहारा मिलता है।
आगे क्या?
बाजार के लिए अगली बड़ी घटना आज जारी होने वाला US Producer Price Index (PPI) है। यह रिपोर्ट महंगाई के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक है और यह देखे जाने की उम्मीद है कि फैक्ट्री गेट की कीमतें उपभोक्ता कीमतों की तरह ही कम हो रही हैं या नहीं। अगर इस इंडेक्स में उम्मीद से ज्यादा महंगाई दिखती है, तो ब्याज दरों को लेकर बाजार का नजरिया फिर से बदल सकता है, जिसका असर सोना और चांदी दोनों पर पड़ेगा। निवेशकों को कीमती धातुओं के बाजार में आगे की संभावित अस्थिरता को समझने के लिए इस डेटा पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
