Gold Price Update: ग्लोबल टेंशन और डॉलर का जोर! सोने में ₹1.6 लाख के पार दिखा उतार-चढ़ाव

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Price Update: ग्लोबल टेंशन और डॉलर का जोर! सोने में ₹1.6 लाख के पार दिखा उतार-चढ़ाव
Overview

ग्लोबल टेंशन और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच, भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखा गया है। 24 कैरेट सोने का भाव **₹160,800** प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। यह स्थिति निवेशकों की मुनाफावसूली (Profit-taking) और डॉलर के मजबूत होने के बीच एक नाजुक संतुलन को दर्शाती है, हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं सोने को सपोर्ट कर रही हैं।

क्यों आ रही है कीमतों में नरमी?

24 फरवरी, 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने के भाव में थोड़ी नरमी दिखी और यह ₹160,800 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसके पीछे की मुख्य वजहें हैं:

  1. मुनाफावसूली (Profit-taking): हालिया तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो से मुनाफा निकालने का फैसला किया।
  2. मजबूत डॉलर: अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 97.8405 तक मजबूत हुआ, जो ऐतिहासिक रूप से सोने के लिए एक हेडविंड (Headwind) यानी रुकावट का काम करता है।
  3. फेडरल रिजर्व की पॉलिसी: फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर के इस संकेत ने कि अगर अमेरिका के जॉब्स डेटा मजबूत रहे तो रेट कट रुक सकते हैं, मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है।

भू-राजनीतिक तनाव का सपोर्ट

इन दबावों के बावजूद, सोना सुरक्षित निवेश (Safe-haven asset) के तौर पर अपनी चमक बनाए हुए है। लगातार जारी ट्रेड टैरिफ डिस्प्यूट्स (Trade Tariff Disputes) और अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर टॉक्स (US-Iran Nuclear Talks) की बहाली की उम्मीदें बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Risk Premium) बनाए हुए हैं। 24 फरवरी, 2026 को सोने के फ्यूचर्स (Gold Futures) करीब $5,167 प्रति औंस पर कारोबार कर रहे थे।

इंटरनेशनल मार्केट और भारतीय प्रीमियम

भारतीय सोने की कीमतें दुबई जैसे इंटरनेशनल हब के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड कर रही हैं। 24 फरवरी, 2026 को दुबई में 24 कैरेट सोना करीब 5.26% सस्ता था। यह घरेलू मांग में मजबूती का संकेत देता है।

गोल्ड ETF का दमदार प्रदर्शन

भारतीय गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। ICICI Prudential Gold ETF और Nippon India Gold BeES जैसे टॉप Gold ETFs ने 1 साल में 74% से 80% तक का रिटर्न दिया है, वहीं 5 साल का CAGR 25% से ऊपर रहा है। जनवरी 2026 में तो भारतीय गोल्ड ETFs में इक्विटी फंड्स से ज्यादा इनफ्लो (Inflow) देखा गया, जो निवेशकों के बीच सोने को वेल्थ प्रिजर्वेशन (Wealth Preservation) के तौर पर बढ़ती लोकप्रियता दिखा रहा है।

बीते कल की कहानी: मैक्रो कोरिलेशन (Macro Correlation)

ऐतिहासिक रूप से, ट्रेड टेंशन बढ़ने पर सोने की कीमतों में तेजी देखी गई है। 2025 में प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीतियों के दौरान सोने की कीमतों में बड़ी उछाल आई थी, जब निवेशकों ने ट्रेड वॉर की अनिश्चितता से बचने के लिए सोना खरीदा था। डॉलर इंडेक्स और सोने की कीमतों के बीच उल्टा रिश्ता (Inverse Relationship) एक स्थापित बाजार की सच्चाई है - मजबूत डॉलर सोने को दबाता है। हालांकि, वैश्विक तनाव के दौर में यह कोरिलेशन बदल सकता है।

आगे क्या हो सकता है? (The Bear Case)

संभावित जोखिमों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता:

  • डॉलर की और मजबूती: अगर डॉलर लगातार मजबूत होता रहा, तो सोने की कीमतों पर बड़ा दबाव आ सकता है।
  • भू-राजनीतिक तनाव में कमी: अगर अमेरिका-ईरान वार्ता जैसी चीजें पटरी पर आईं, तो सेफ-हेवन डिमांड कम हो सकती है।
  • फेड की ऊंची ब्याज दरें: अगर ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा समय तक ऊंची रहीं, तो सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding assets) के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
  • आयात का दबाव: भारत का सोने का भारी आयात ट्रेड बैलेंस पर दबाव बनाता है।
  • बड़ी बिकवाली का डर: कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेज कीमतों के बाद सेंट्रल बैंक अपनी रिजर्व का कुछ हिस्सा बेच सकते हैं।

भविष्य का संकेत (Future Outlook)

विश्लेषक 2026 में सोने के लिए बुलिश (Bullish) बने हुए हैं। कई ब्रोकरेज फर्मों ने सोने के लिए $5,000 से $6,000 प्रति औंस का टारगेट दिया है। मौजूदा prices $5,167-$5,249 प्रति औंस के आसपास हैं। लगातार भू-राजनीतिक जोखिम, सेंट्रल बैंकों द्वारा डायवर्सिफिकेशन (Diversification) और संभावित फेड रेट कट्स (Fed Rate Cuts) सोने की मांग को बनाए रखने की उम्मीद है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का अनुमान है कि 2026 में सोना 5-15% तक बढ़ सकता है, जो इकोनॉमिक स्लोडाउन और रेट कट्स की गति पर निर्भर करेगा। चीनी बाजारों के खुलने के बाद ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक (Global Economic Outlook) पर और स्पष्टता आएगी।

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