बाजार में क्यों है उठापटक?
Gold की कीमतों में फिलहाल नरमी के पीछे कई वजहें हैं। अमेरिका से आ रहे आर्थिक आंकड़े मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। एक तरफ, जनवरी में महंगाई दर (CPI) घटकर 2.4% रही, जिससे फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के ब्याज दरें घटाने की उम्मीदें बढ़ीं। वहीं, दूसरी तरफ, नॉन-फार्म पेरोल (Nonfarm Payrolls) के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे और बेरोजगारी दर में गिरावट आई। ऐसे मिले-जुले संकेत अक्सर बुलियन (Bullion) यानी सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए एक अस्थिर माहौल बनाते हैं। इसके अलावा, चीन और अन्य एशियाई देशों में चल रही छुट्टियों की वजह से ट्रेडिंग वॉल्यूम कम है, जिससे कीमतों में बड़ी चाल नहीं दिख रही है।
लंबी अवधि में सोने की चमक बरकरार
छोटी-मोटी रुकावटों के बावजूद, ज्यादातर एक्सपर्ट्स और वित्तीय संस्थान आने वाले समय में सोने की कीमतों में बड़ी तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। अनुमान है कि 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) तक गोल्ड की कीमत $6,000 प्रति औंस का आंकड़ा पार कर सकती है। इसकी मुख्य वजहें हैं - लगातार बने रहने वाले भू-राजनीतिक तनाव, जो सोने को एक 'सुरक्षित निवेश' (Safe-haven Asset) बनाते हैं। वैश्विक वित्तीय सिस्टम में अनिश्चितता और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर सवाल भी सोने की मांग को बढ़ा रहे हैं। ANZ बैंक ने तो Q2 2026 के लिए गोल्ड का लक्ष्य $5,800 रखा है, जबकि JPMorgan का अनुमान $5,055 (2026 की चौथी तिमाही तक) है। Goldman Sachs का भी मानना है कि ETF में निवेश और सेंट्रल बैंकों की खरीद से गोल्ड $4,900 प्रति औंस तक जा सकता है। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) लगातार 15वें महीने सोना खरीद रहा है, जो ग्लोबल रिजर्व में विविधता लाने की रणनीति दिखाता है।
चीन का बाजार और सोने की मांग
चीन का बाजार, छुट्टियों के दौरान भी, सोने की कीमतों पर बड़ा असर डालता है। भले ही अभी ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो, लेकिन 2025 में सोने के निवेश उत्पादों में रिकॉर्ड तोड़ इनफ्लो देखा गया था। हाल ही में शेन्ज़ेन में 'अवैध सोने के व्यापार' (illegal gold trading) पर कार्रवाई हुई, जो सोने के प्रति जबरदस्त, और कभी-कभी अत्यधिक, निजी मांग को दर्शाती है। यह नियामक कार्रवाई इस बात का संकेत है कि सोने की मांग मजबूत है और सामान्य होने पर फिर से तेजी से बढ़ सकती है। ऐतिहासिक रूप से, चीन की छुट्टियों के दौरान सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आती है, लेकिन बाद में इनमें जोरदार वापसी देखने को मिलती है।
जोखिम (Risks) क्या हैं?
हालांकि, कुछ जोखिम भी हैं जो सोने की तेजी को रोक सकते हैं। अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरें घटाने में देरी करता है या आक्रामक रुख अपनाता है, तो सोने पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, अगर वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों में बड़ी कमी आती है, तो सोने की 'सुरक्षित निवेश' वाली अपील कम हो जाएगी। अमेरिकी डॉलर (US Dollar) का मजबूत होना भी सोने के लिए एक चुनौती हो सकती है। वहीं, सिल्वर, जो फिलहाल $74.75 प्रति औंस पर है, सोने के मुकाबले कमजोरी दिखा सकता है। गोल्ड-सिल्वर का अनुपात (Gold-Silver Ratio), जो 63.45:1 के करीब था, भी कुछ समय से बढ़ रहा है, जो सिल्वर के लिए चिंता की बात है।
आगे की राह
जैसे ही प्रमुख एशियाई बाजार खुलेंगे, ट्रेडिंग लिक्विडिटी (Trading Liquidity) में सुधार होगा और कीमतों की दिशा को लेकर और स्पष्टता आने की उम्मीद है। हालांकि अल्पावधि में कीमतें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेड मिनट्स और भू-राजनीतिक घटनाओं पर प्रतिक्रिया दे सकती हैं, लेकिन लंबी अवधि में सेंट्रल बैंकों की खरीद, महंगाई से बचाव और सिस्टमिक रिस्क से बचने की प्रवृत्ति सोने की कीमतों को मजबूत सहारा देती रहेगी। निवेशकों को अभी कुछ समय तक कंसॉलिडेशन (Consolidation) यानी एक दायरे में कारोबार देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर, सोने की कीमतें 2026 की दूसरी तिमाही तक ऊपर की ओर जाने के लिए तैयार दिख रही हैं।
