Gold Price Target: सोने में ₹5,000 तक का उछाल संभव? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold Price Target: सोने में ₹5,000 तक का उछाल संभव? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

विश्लेषकों का मानना है कि अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतें गिरती हैं, तो सोना **$5,000** के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, फेडरल रिजर्व की नीतियां और डॉलर की मजबूती सोने की चाल तय करेंगी।

भू-राजनीतिक तनाव और सोने की चाल

साल 2026 में सोने ने उम्मीदों के विपरीत प्रदर्शन किया है। आमतौर पर संघर्ष के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन हाल के भू-राजनीतिक तनावों ने कीमतों पर दबाव डाला है। युद्ध क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिसने महंगाई को हवा दी। इसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व को सख्त मौद्रिक नीति अपनानी पड़ी, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और रियल यील्ड (real yield) ऊंची बनी रही। यह सोने जैसी नॉन-यील्डिंग संपत्तियों में निवेश को हतोत्साहित करता है।

महंगाई और फेडरल रिजर्व की नीतियां

इस साल तेल की कीमतों और सोने के बीच का संबंध एक प्रमुख कारक रहा है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई की उम्मीदें बढ़ती हैं, जिससे फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी का संकेत देता है। मई के CPI डेटा के बाद यह साफ दिखा, जिसमें महंगाई 4.2% सालाना थी, जिसने सेंट्रल बैंक के हॉकिश (hawkish) रुख को और मजबूत किया। निवेशकों ने देखा कि सोने की कीमत जनवरी के उच्चतम स्तर से लगभग 30% गिर गई क्योंकि बाजारों ने अधिक आक्रामक मौद्रिक नीति का अनुमान लगाया था।

हालांकि, हाल के आंकड़ों से बदलाव के संकेत मिले हैं। जून का CPI प्रिंट घटकर 3.5% सालाना रहा, और कोर इन्फ्लेशन (core inflation) में भी नरमी दिखी। इससे पता चलता है कि ऊर्जा-संचालित महंगाई का चक्र धीमा पड़ रहा है। जैसे-जैसे रेट-हाइक की उम्मीदें कम हो रही हैं, सोने ने मामूली रिकवरी दिखाई है, लेकिन फेडरल रिजर्व की अनिश्चित टिप्पणियों के कारण इसमें प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है।

सेंट्रल बैंक की मांग और प्राइस फ्लोर

बाजार की अस्थिरता के बावजूद, वैश्विक सेंट्रल बैंकों की ओर से लगातार मांग बनी हुई है। जून 2026 तक, चीन ने लगातार बीसवें महीने सोने के रिजर्व में वृद्धि दर्ज की है। यह स्थिर खरीदारी कीमतों में गिरावट को सीमित करने में एक महत्वपूर्ण बफर का काम करती है।

आगे की राह

$5,000 के लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता महंगाई में टिकाऊ गिरावट और भू-राजनीतिक जोखिमों के कम होने पर निर्भर करेगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो रियल यील्ड में राहत से सोने को $4,200-$4,400 की रेंज का परीक्षण करने का मौका मिल सकता है। इसके विपरीत, यदि भू-राजनीतिक स्थिति बिगड़ती है, तो तेल पर महंगाई का असर फेडरल रिजर्व को फिर से सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर सकता है। ऐसी स्थिति में, $3,950 और $3,800 के स्तर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। सोने की अंतिम दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वर्तमान महंगाई-विरोधी रुझान वैश्विक सेंट्रल बैंक की नीतियों और अमेरिकी डॉलर की मजबूती को प्रभावित करते रहेंगे।

Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.