Gold Market: फेड की चाल से आजाद हुआ सोना! अब बदल गया निवेश का पूरा गणित

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Market: फेड की चाल से आजाद हुआ सोना! अब बदल गया निवेश का पूरा गणित

सोना अब अमेरिकी ब्याज दरों के असर से बाहर निकल रहा है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक तेजी से गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं और अमेरिका का नेशनल कर्ज **$40 ट्रिलियन** के पार पहुंच चुका है। भारतीय निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सोना अब सिर्फ शॉर्ट-टर्म हेज नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो का जरूरी हिस्सा बन चुका है।

बदल गया है सोने का मिजाज

इतिहास गवाह है कि जब भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) ब्याज दरों में कटौती करता था, सोने में तेजी आती थी और ऊंची दरों के दौर में सोने के भाव सुस्त पड़ जाते थे। लेकिन अब बाजार का ट्रेंड पूरी तरह बदल चुका है। अब सोना ब्याज दरों की परवाह किए बिना अपनी चमक बरकरार रख रहा है। ग्लोबल निवेशक अब शॉर्ट-टर्म मुनाफे के बजाय आर्थिक अस्थिरता से बचाव को प्राथमिकता दे रहे हैं।

क्यों खरीदारी कर रहे हैं सेंट्रल बैंक?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का डेटा बताता है कि ग्लोबल गोल्ड डिमांड में सेंट्रल बैंकों का हिस्सा अब 20% के करीब पहुंच गया है। आम निवेशकों की तरह ये बैंक रोज के भाव को देखकर ट्रेडिंग नहीं करते, बल्कि जियो-पॉलिटिकल तनाव को देखते हुए इसे एक सुरक्षित और रणनीतिक संपत्ति के तौर पर जमा कर रहे हैं।

अमेरिका का कर्ज और डॉलर की चिंता

अमेरिका का नेशनल डेट $40 ट्रिलियन के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी डॉलर की परचेजिंग पावर पर सवाल उठने लगे हैं। जब निवेशकों को लगता है कि किसी करेंसी की वैल्यू गिर सकती है, तो वे गोल्ड की ओर रुख करते हैं क्योंकि सोना किसी एक सरकार की फिस्कल पॉलिसी के अधीन नहीं है।

भारतीय निवेशकों के लिए सीख

भारत में सोना हमेशा से खपत या महंगाई के खिलाफ एक टूल माना जाता रहा है, लेकिन अब इसे पोर्टफोलियो को मजबूती देने वाले एक 'स्ट्रक्चरल एसेट' के तौर पर देखना होगा। हालांकि, भारत में गोल्ड के भाव अभी भी रुपये-डॉलर की चाल और इम्पोर्ट ड्यूटी पर निर्भर करेंगे, लेकिन लंबे समय का नजरिया अब केवल फेड की पॉलिसी नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी की बदलती हकीकत से तय होगा।

निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इस बड़े बदलाव का मतलब यह नहीं है कि सोने में हमेशा तेजी ही रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव और करेक्शन आते रहेंगे, इसलिए अब सिर्फ फेड की मीटिंग के नतीजों पर नहीं, बल्कि दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों के गोल्ड बाइंग डेटा पर नजर रखना ज्यादा जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.