सोने पर कर्ज़ क्यों बढ़ा?
आजकल दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और अनसिक्योर्ड (unsecured) पर्सनल लोन के नियमों के सख्त होने के कारण, लोग सुरक्षित माने जाने वाले सोने के बदले लोन लेने की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह एक बड़ा ट्रेंड बन गया है। उम्मीद है कि ऑर्गेनाइज़्ड गोल्ड लोन मार्केट मार्च 2026 तक ₹15 ट्रिलियन तक पहुँच जाएगा, जो पहले के अनुमानों से एक साल पहले ही संभव हो सकता है। बैंकों का दबदबा इस सेक्टर में लगातार बढ़ रहा है। दिसंबर 2025 तक गोल्ड लोन के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹10.6 लाख करोड़ तक पहुंच गए हैं। सोने की बढ़ती कीमतें भी इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं, क्योंकि इससे लोग अपने मौजूदा सोने पर ही ज़्यादा लोन ले पा रहे हैं।
RBI के नए नियम और कर्जदारों के लिए फायदे
इस बढ़ते सेक्टर को देखते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने गोल्ड लोन के नियमों में बदलाव किए हैं। 1 अप्रैल 2026 से नए Loan-to-Value (LTV) रेश्यो लागू होंगे। पहले जहां एक समान 75% LTV कैप था, वहीं अब इसे टियर (tier) में बांटा गया है:
- ₹2.5 लाख तक के लोन पर 85% LTV
- ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक के लोन पर 80% LTV
- ₹5 लाख से ज़्यादा के लोन पर 75% LTV
इस कदम का मकसद छोटे कर्जदारों को ज़्यादा लिक्विडिटी (liquidity) देना है, जिससे वे अपने सोने के बाज़ार मूल्य का 85% तक लोन ले सकें। यह अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन की तुलना में काफी सस्ता भी पड़ता है, जिनके इंटरेस्ट रेट 10.5% से लेकर 24% सालाना तक हो सकते हैं (बैंकों का औसत 12-13%)। वहीं, गोल्ड लोन पर इंटरेस्ट रेट आमतौर पर 9-15% के बीच रहता है।
असल रिस्क क्या है?
गोल्ड लोन के बढ़ते चलन और नए नियमों के बावजूद, कर्जदारों के लिए एक बड़ा रिस्क सोने की कीमतों में तेज़ी से होने वाला उतार-चढ़ाव (volatility) है। इतिहास गवाह है, साल 2013 में जब सोने के दाम गिरे थे, तो कई कर्जदारों को भारी परेशानी हुई थी। उस वक्त, कीमतों में 10% की मामूली गिरावट से भी कोलैटरल (collateral) का वैल्यू इतना कम हो गया था कि ज़्यादा LTV (जैसे 80-90%) वाले लोन डिफॉल्ट (default) में चले गए, और सोने की नीलामी काफी कम दामों पर हुई।
नए टियर्ड LTV सिस्टम, खासकर छोटे लोन के लिए 85% कैप के साथ, इस रिस्क को और बढ़ा सकता है। सोने की कीमतों में सिर्फ 5-10% की गिरावट भी LTV की सीमा को पार कर सकती है, जिससे कर्जदारों को या तो अतिरिक्त कोलैटरल देना पड़ सकता है या लोन की कुछ राशि तुरंत चुकानी पड़ सकती है। साल 2026 की शुरुआत में सोने के भाव, जैसे ₹16,200-₹17,300 प्रति ग्राम (24-कैरेट) के स्तर पर, पहले से ही काफी ऊंचे हैं, ऐसे में कीमतों में बड़ी गिरावट का खतरा बना हुआ है। जो कर्जदार इन ऊंचे दामों पर अपने सोने का इस्तेमाल करके ज़्यादा लोन ले रहे हैं, उन्हें इस खतरे को ध्यान में रखना चाहिए। सुरक्षित उधार (secured lending) की ओर यह रुझान भारत के क्रेडिट मार्केट का एक अहम हिस्सा बन गया है, जो Q3 FY26 तक नए लोन सोर्सिंग का 34% था।
आगे का अनुमान
विश्लेषकों का मानना है कि गोल्ड लोन मार्केट में ग्रोथ जारी रहेगी, क्योंकि सोने की डिमांड और सुरक्षित उधार (secured lending) को बढ़ावा देने वाले रेगुलेटरी माहौल का असर बना रहेगा। भारत में सोने की सांस्कृतिक और वित्तीय अहमियत को देखते हुए, यह कोलैटरल के रूप में अपनी जगह बनाए रखेगा। हालांकि, मौजूदा ऊंचे भाव और छोटे कर्जदारों के लिए नए LTV नियमों से मिलने वाला ज़्यादा फायदा, एक नाजुक स्थिति पैदा करता है। भले ही तात्कालिक नकदी की ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं, लेकिन कीमतों में उलटफेर का अंतर्निहित जोखिम कर्जदारों को सतर्क रहने और सोच-समझकर पुनर्भुगतान योजना (repayment planning) बनाने की सलाह देता है।