साल 2026 की पहली तिमाही (Q1) में भारत में सोने की इनवेस्टमेंट डिमांड **54%** बढ़कर **82 टन** पर पहुंच गई है। रिकॉर्ड सोने की कीमतों के कारण, लोग अब फिजिकल जूलरी के बजाय फाइनेंशियल एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं। जहां जूलरी की डिमांड घटी है, वहीं गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में रिकॉर्ड इनफ्लो (inflows) देखा जा रहा है, जो दिखाता है कि भारतीय सोने में अपना पैसा लगाने का तरीका बदल रहे हैं।
सोने की डिमांड में बड़ा बदलाव?
भारत का गोल्ड मार्केट एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है, जहां रिकॉर्ड तोड़ कीमतें ग्राहकों के व्यवहार को बदल रही हैं। 24-कैरेट सोने का भाव ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस वजह से, भारतीय परिवार अब फिजिकल जूलरी की जगह सोने को एक फाइनेंशियल इनवेस्टमेंट के तौर पर ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
फाइनेंशियल एसेट्स की ओर झुकाव
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के साल 2026 की पहली तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, इनवेस्टमेंट डिमांड (जिसमें बार, कॉइन और गोल्ड ईटीएफ शामिल हैं) पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 54% बढ़ी है। अब यह सेगमेंट भारत की कुल सोने की डिमांड का लगभग 70% है। इसके विपरीत, फिजिकल जूलरी की डिमांड गिरी है, जिसका हिस्सा घटकर लगभग 30% रह गया है, जो साल 2000 के बाद सबसे निचला स्तर है। हालांकि, पहली तिमाही में जूलरी पर कुल खर्च ₹99,900 करोड़ हुआ, लेकिन खरीदे गए सोने का वजन कम हुआ क्योंकि ग्राहकों ने अपने बजट में रहने के लिए हल्के या कम कैरट वाले डिज़ाइन चुने।
डिजिटल का बढ़ता चलन और ईटीएफ ग्रोथ
फाइनेंशियल गोल्ड की ओर यह कदम डिजिटल इनवेस्टमेंट व्हीकल्स को तेजी से अपनाने का नतीजा है। भारत में गोल्ड ईटीएफ के मैनेजमेंट के तहत एसेट्स (Assets Under Management) में भारी बढ़ोतरी देखी गई है, जो मार्च 2025 में ₹59,000 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 तक ₹1.7 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। इस ट्रेंड की मुख्य वजह युवा निवेशक हैं जो गोल्ड खरीदने के लिए मोबाइल ऐप्स और एसआईपी (SIP) की सुविधा पसंद करते हैं। इससे मेकिंग चार्ज, स्टोरेज की सुरक्षा और प्योरिटी (शुद्धता) जैसी पारंपरिक समस्याओं से बचा जा सकता है।
मार्केट पर असर
यह स्ट्रक्चरल चेंज बताता है कि शादियों के दौरान सोने की सांस्कृतिक मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन अब मार्केट की मुख्य दिशा फाइनेंशियल लक्ष्यों से तय हो रही है। फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के आने और डीमैट अकाउंट में सोना रखने की आसानी से निवेशकों के लिए सोने को अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो का एक स्टैंडर्ड हिस्सा मानना आसान हो गया है, ठीक म्यूचुअल फंड की तरह। निवेशकों के लिए, इस बदलाव का मतलब है कि फिजिकल जूलरी की खपत पर ऊंची कीमतों का दबाव होने के बावजूद, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के जरिए सोने की लिक्विडिटी (liquidity) बेहतर हो रही है।
भविष्य के ट्रेंड्स पर नजर
निवेशक यह देख सकते हैं कि क्या सोने की कीमतें स्थिर होने पर यह ट्रेंड जारी रहता है या ग्राहक फिर से पारंपरिक जूलरी की खरीदारी की ओर लौटते हैं। गोल्ड ईटीएफ एसेट्स अंडर मैनेजमेंट की लगातार ग्रोथ और आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान कंज्यूमर स्पेंडिंग पैटर्न (consumer spending patterns) का विकास, ये मुख्य फैक्टर्स हैं जिन पर नजर रखी जानी चाहिए। अगर डिजिटल गोल्ड को प्राथमिकता मिलती रहती है, तो फिजिकल जूलरी की मांग की तुलना में इसमें कम उतार-चढ़ाव आ सकता है, जो त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह पर ज्यादा निर्भर करती है।
