सोने की कीमतें $4,400 प्रति औंस के आसपास स्थिर बनी हुई हैं। मजबूत अमेरिकी रोजगार डेटा और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच निवेशक कंफ्यूज हैं, जिसके चलते बाजार फेडरल रिजर्व की अगली बैठक का इंतजार कर रहा है।
सोना फिलहाल एक सीमित दायरे में फंस गया है। एक तरफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का दबाव है, तो दूसरी तरफ ग्लोबल अस्थिरता ने कीमतों को नीचे गिरने से रोक रखा है।
अमेरिकी लेबर डेटा का असर
हालिया आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में अमेरिका में 1,62,000 नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार के अनुमान से काफी बेहतर है। मजबूत लेबर मार्केट का मतलब है कि फेडरल रिजर्व महंगाई को काबू में रखने के लिए सख्ती जारी रख सकता है। चूंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए 60% संभावना जताई जा रही है कि 15-16 सितंबर की बैठक में फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा। इससे डॉलर और ट्रेजरी यील्ड में मजबूती आई है, जो सोने पर दबाव डाल रही है।
जियोपॉलिटिकल सपोर्ट
ब्याज दरों के डर के बावजूद, सोने को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से सहारा मिल रहा है। 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में सुरक्षा चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $100 प्रति बैरल के पास बना हुआ है। जब भी वैश्विक तनाव बढ़ता है, निवेशक सोने को एक 'सेफ हेवन' (Safe Haven) के रूप में देखते हैं, जो कीमतों को गिरने से बचा रहा है।
निवेशकों की नजरें कहां हैं?
अब सबकी नजरें इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) डेटा पर हैं। अगर महंगाई का आंकड़ा उम्मीद से ज्यादा आता है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी तय मानी जा सकती है, जो सोने के लिए महंगा साबित हो सकता है। फिलहाल, बाजार पूरी तरह से डेटा के इंतजार में 'होल्डिंग पैटर्न' पर है।
