सोने की कीमतों में बुधवार को लगभग **0.44%** की बढ़ोतरी देखी गई और यह करीब **$4,095** प्रति औंस पर पहुंच गया। कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुस्त पड़ती लेबर मार्केट ने सोने को सहारा दिया है। निवेशक अमेरिकी रोज़गार रिपोर्ट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व के ब्याज दरों पर फैसले और सोने की अगली दिशा तय हो सकती है।
सोने को मिला सहारा
बुधवार को सोने की कीमतों को सहारा मिला और यह करीब $4,095 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है, जो लगभग 0.44% की बढ़त दर्शाता है। फिलहाल, कीमती धातु को कमजोर अमेरिकी डॉलर का फायदा मिल रहा है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है। साथ ही, अमेरिकी लेबर मार्केट के सुस्त पड़ने के संकेत भी कीमतों को बल दे रहे हैं।
अमेरिकी लेबर मार्केट पर सबकी नज़र
बाजार की मुख्य नज़र आज अमेरिकी लेबर मार्केट पर है। हाल के आंकड़ों से पता चला है कि जून में नौकरी के अवसर घटकर 73.6 लाख रह गए, जो विश्लेषकों की उम्मीद 74.4 लाख से कम है। यह सुस्ती इसलिए भी अहम है क्योंकि फेडरल रिज़र्व अपनी ब्याज दर नीति तय करते समय रोज़गार के आंकड़ों पर बारीकी से नज़र रखता है।
ब्याज दरों का खेल और सोने का भविष्य
सोना एक ऐसी संपत्ति है जिससे कोई आय (जैसे ब्याज या डिविडेंड) नहीं मिलती। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो सोने को होल्ड करने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ जाती है, यानी निवेशक कहीं और पैसा लगाकर ज़्यादा कमा सकते थे। इससे अक्सर सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है। अगर आने वाली रोज़गार रिपोर्ट (जैसे आज का ADP प्राइवेट पेरोल डेटा या शुक्रवार को नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट) उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत जॉब मार्केट का संकेत देती है, तो फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है। ऐसी स्थिति में सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
भू-राजनीतिक तनाव का भी असर
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के अलावा, निवेशक मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनावों पर भी नज़र रख रहे हैं। अमेरिका और ईरान से संबंधित राजनयिक घटनाक्रम बाज़ार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। जब अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक अक्सर 'सुरक्षित आश्रय' (safe-haven) के तौर पर सोने का रुख करते हैं। इसके अलावा, इन तनावों का वैश्विक तेल कीमतों पर असर और लगातार बढ़ती महंगाई की चिंताएं केंद्रीय बैंक के निर्णय लेने की प्रक्रिया को और जटिल बना रही हैं।
आगे की राह
निवेशकों के लिए, सोने का निकट अवधि का दृष्टिकोण इन दो ताकतों - आर्थिक डेटा और भू-राजनीतिक जोखिम - के तालमेल पर टिका है। रोज़गार के आंकड़ों में तेज़ी अमेरिकी डॉलर को मज़बूत कर सकती है और सोने को कमजोर कर सकती है, जबकि उम्मीद से कमज़ोर रिपोर्ट ब्याज दरों में ठहराव या कटौती की ओर इशारा कर सकती है। बाज़ार यह जानने के लिए इन लेबर आंकड़ों पर करीब से नज़र रखेगा कि क्या सोना अपनी वर्तमान ट्रेडिंग रेंज से बाहर निकल पाता है या उसे मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण से दबाव का सामना करना पड़ता है।
