कीमती धातुओं का बदलता रुख
19 मई 2026 को सोने की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया, जहां भारतीय बाजार में सोने का भाव ₹1.59 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का रुझान दिखा, हालांकि चांदी (Silver) में दिन के दौरान तेज गिरावट आई। यह तेजी मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी आर्थिक नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर है। कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी सोने को सहारा दिया, जिससे यह अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए अधिक किफायती हो गया। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने महंगाई की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया। अल्पावधि में उतार-चढ़ाव के बावजूद, सोने को अब सिर्फ महंगाई से बचाव के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक वित्तीय अस्थिरता के खिलाफ मूल्य के एक महत्वपूर्ण भंडार के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने का भाव $5,000 से $6,000 प्रति औंस तक जा सकता है।
मैक्रोइकॉनॉमिक्स का असर
बाजार पर कई बड़े मैक्रोइकॉनॉमिक ट्रेंड्स का असर दिख रहा है। अप्रैल 2026 में अमेरिकी महंगाई दर 3.8% पर पहुंच गई, जो उम्मीद से ज्यादा थी। इससे फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) से जल्द ब्याज दर में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं। उम्मीद है कि इस साल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा। US Dollar Index (DXY) करीब 97.84 पर स्थिर बना हुआ है, हालांकि 2026 के अंत तक इसके 90-96 तक कमजोर होने का अनुमान है। भू-राजनीतिक तनाव, खासकर मध्य पूर्व को लेकर, कच्चे तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल के आसपास बनाए हुए है। Trading Economics की रिपोर्ट के अनुसार, 19 मई 2026 को ब्रेंट क्रूड $103.13 पर कारोबार कर रहा था। लगातार महंगाई, अस्थिर ऊर्जा कीमतें और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी (जो 2025 के अंत में औसतन 70 टन प्रति माह थी) की वजह से कीमती धातुओं को मजबूत सहारा मिल रहा है।
चांदी का अलग रुख और चुनौतियां
वैश्विक चांदी की कीमतों के लिए अनुमान अलग-अलग हैं। HSBC का अनुमान है कि औसत कीमत $75 प्रति औंस रहेगी और साल के अंत तक यह $70 के करीब पहुंच सकती है। वहीं, कुछ अन्य $100-$110 तक जाने की संभावना जता रहे हैं। यह उम्मीद ग्रीन टेक्नोलॉजी की मांग और सप्लाई में कमी पर आधारित है।
सकारात्मक उम्मीदों के बावजूद, चुनौतियां बनी हुई हैं। JPMorgan ने हाल ही में 2026 के लिए सोने की औसत कीमत का अनुमान घटाकर $5,243 प्रति औंस कर दिया है, जिसका कारण निवेशकों की रुचि में आई कमी और COMEX पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में स्थिरता बताई गई है। HSBC का चांदी पर सतर्क रुख यह दर्शाता है कि सप्लाई की कमी कीमतों में बड़ी उछाल को सीमित कर सकती है। इसके अलावा, उम्मीद से ज्यादा अमेरिकी महंगाई या फेड की नीतियां अगर सख्त होती हैं, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो बिना रिटर्न वाली संपत्ति (non-yielding assets) कम आकर्षक लगती हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर, जो अप्रत्याशित आर्थिक मजबूती या लगातार महंगाई से प्रेरित हो, एक और जोखिम है, क्योंकि सोना आमतौर पर डॉलर के विपरीत दिशा में चलता है।
भारतीय निवेशक सोना क्यों अपना रहे हैं?
भारत में, निवेशकों का सोने के प्रति नजरिया बदल रहा है। सोना अब पारंपरिक शादियों या त्योहारों के अलावा एक 'फाइनेंशियल प्रोटेक्शन एसेट' के रूप में देखा जा रहा है। वैश्विक महंगाई की चिंता और अस्थिर शेयर बाजारों के बीच, निवेशक सोने की कीमतों में गिरावट का फायदा उठाकर अपनी होल्डिंग बढ़ा रहे हैं। यह बदलाव खासकर युवा निवेशकों में दिख रहा है, जो तेजी से डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETFs और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) को अपना रहे हैं। भारतीय डिजिटल गोल्ड मार्केट के 2026-2027 तक ₹9,841 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें सालाना 30-35% की वृद्धि दर देखी जा सकती है। 2025 में डिजिटल गोल्ड लेनदेन में 69% की बढ़ोतरी हुई, जो भौतिक सोने की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सुलभ तरीके से निवेश करने की ओर इशारा करता है।
2026 के लिए आउटलुक
2026 में कीमती धातुओं का outlook मिश्रित रहने की उम्मीद है। JP Morgan, Goldman Sachs और Bank of America जैसे संस्थानों के अनुमानों के अनुसार, साल के अंत तक सोने की कीमतें $5,000-$6,000 तक पहुंच सकती हैं। यह अनुमान केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी और साल के अंत में मौद्रिक नीति में धीरे-धीरे ढील दिए जाने पर आधारित है। चांदी की कीमत औद्योगिक मांग और आपूर्ति में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील रहने की उम्मीद है। अनुमान अलग-अलग हैं, लेकिन ग्रीन टेक्नोलॉजी में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण ऐतिहासिक औसत से अधिक कीमतों की ओर इशारा करते हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता, लगातार महंगाई और केंद्रीय बैंकों की बदलती रणनीतियों का तालमेल ही किसी भी आगे की मूल्य वृद्धि की गति और सीमा तय करेगा।