Gold Price: महंगाई के आंकड़ों से सोने में तूफानी तेजी! 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंचा भाव, वहीं कच्चे तेल में गिरावट

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
Gold Price: महंगाई के आंकड़ों से सोने में तूफानी तेजी! 2 महीने की ऊंचाई पर पहुंचा भाव, वहीं कच्चे तेल में गिरावट

आज के कारोबारी सत्र में सोने की कीमतों ने निवेशकों को मालामाल कर दिया। महंगाई (Inflation) के आंकड़ों के ठंडा पड़ने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें कम हो गईं, जिससे सोने का भाव 2 महीने की ऊंचाई पर जा पहुंचा। वहीं, दूसरी ओर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में **1.5%** से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जिसका कारण 2026 के लिए वैश्विक मांग के पूर्वानुमानों में कटौती और अमेरिकी क्रूड इन्वेंटरी में भारी उछाल है।

सोने में क्यों आई उछाल?

गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमतों में 0.9% की तेजी देखी गई और यह लगभग $4,450 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। चांदी (Silver) ने भी 1% की बढ़त के साथ $65.94 प्रति औंस का स्तर छुआ। इस तेजी की मुख्य वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। जब महंगाई के आंकड़े कम आते हैं, तो केंद्रीय बैंक पर ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने का दबाव कम हो जाता है, जिससे सोने जैसी नॉन-इंटरेस्ट-बेयरिंग एसेट्स निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो जाती हैं।

कच्चे तेल पर दबाव

जहां एक ओर सोना चमका, वहीं एनर्जी मार्केट में गिरावट का माहौल रहा। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फ्यूचर $87.69 प्रति बैरल तक गिर गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर $81.97 प्रति बैरल पर आ गया। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग के अनुमानों में कमी आना है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, अब वैश्विक तेल की खपत में प्रतिदिन 16 लाख बैरल की गिरावट की आशंका है। इसके अलावा, 7 अगस्त 2026 को समाप्त सप्ताह के लिए अमेरिकी क्रूड इन्वेंटरी में 17.4 मिलियन बैरल की बढ़ोतरी हुई, जो 2023 की शुरुआत के बाद सबसे बड़ा उछाल है। यह ज्यादा इन्वेंटरी अक्सर यह संकेत देती है कि सप्लाई, मौजूदा खपत से ज्यादा हो रही है।

भू-राजनीतिक जोखिम और डेटा का संतुलन

तेल पर दबाव के बावजूद, बाजार सप्लाई की दिक्कतों को लेकर संवेदनशील बना हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित रुकावटों की चिंताएं, तेल की कीमतों को एक सपोर्ट दे रही हैं। निवेशकों के लिए, ये कमोडिटीज फिलहाल दो अलग-अलग बाजार की भावनाओं को दर्शाती हैं: तेल पर आर्थिक मंदी का डर हावी है, जबकि सोने को महंगाई से राहत मिलने में मदद मिल रही है।

भारतीय संदर्भ में, इन रुझानों के खास मायने हैं। वैश्विक स्तर पर तेल की कम कीमतें आम तौर पर देश के तेल आयात बिल को कम करने में मदद करती हैं, जो घरेलू करेंसी के लिए सकारात्मक हो सकता है। इसके विपरीत, सोने की बढ़ती कीमतें अक्सर घरेलू आभूषणों की मांग और महंगाई की भावना पर उनके प्रभाव के लिए देखी जाती हैं। निवेशकों के लिए अगली महत्वपूर्ण जानकारी प्रोड्यूसर प्राइस डेटा होगी, जो अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और कमोडिटी की कीमतों की स्थिरता को और स्पष्ट कर सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.