US 10-Year Treasury Yields के **5.02%** पर पहुंचने के बाद सोने की चमक फीकी पड़ गई है। 2007 के बाद यह सबसे ऊंचा स्तर है, जिससे सोने की कीमतें **5 हफ्ते** के निचले स्तर पर आ गई हैं। फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले **92%** संभावना है कि ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं, जिसका असर MCX पर गोल्ड की कीमतों पर साफ दिख रहा है।
बॉन्ड यील्ड्स का असर
सोना अक्सर सुरक्षा के तौर पर देखा जाता है, लेकिन यह बॉन्ड या एफडी की तरह कोई रेगुलर इनकम नहीं देता। जब US ट्रेजरी यील्ड्स में इतनी बड़ी बढ़त होती है, तो निवेशक सोने को बेचकर उन बॉन्ड्स की ओर भागते हैं जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिल रहा है। इसका सीधा नुकसान गोल्ड को हो रहा है।
फेडरल रिजर्व की बैठक और डॉलर का दबाव
बाजार की नजरें अब 16 सितंबर 2026 को होने वाली फेडरल रिजर्व की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं। चूंकि 92% उम्मीद है कि ब्याज दरें बढ़ेंगी, इससे डॉलर इंडेक्स मजबूत हो रहा है। सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं, इसलिए डॉलर की मजबूती का मतलब है भारतीय निवेशकों के लिए भी सोने का महंगा होना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिकवाली का दबाव बढ़ना।
क्रूड और महंगाई का डबल अटैक
सिर्फ ब्याज दरें ही नहीं, बल्कि $100 प्रति बैरल से ऊपर बने क्रूड ऑयल की कीमतें भी चिंता बढ़ा रही हैं। मिडिल ईस्ट में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बने डर के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे सेंट्रल बैंक पर ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है।
MCX पर क्या है हाल?
भारतीय बाजारों की बात करें तो Multi Commodity Exchange (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी का गोल्ड ₹1,51,155 प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहा है। ग्लोबल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड $4,270–$4,287 प्रति औंस के दायरे में फिसल गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
अगले कुछ दिनों तक बाजार में उतार-चढ़ाव (volatility) जारी रहने की उम्मीद है। फेड की कमेंट्री का इंतजार करें; अगर वे 'हॉकिश' (Hawkish) संकेत देते हैं, तो सोने से पैसा और बाहर निकल सकता है। निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है और देखना होगा कि क्या निचले स्तरों पर इंस्टिट्यूशनल खरीदारी लौटती है या नहीं।
