सोने की कीमतों में पिछले 3 महीनों की सबसे बड़ी तेजी आई है। अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) की ओर से लॉन्ग-डेटेड बॉन्ड बायबैक (long-dated debt buybacks) को दोगुना करने की अप्रत्याशित घोषणा के बाद सोने का भाव **$4,636** प्रति औंस के करीब पहुंच गया है। इस फैसले से बॉन्ड यील्ड (bond yields) में गिरावट आई है और डॉलर कमजोर हुआ है, जिससे सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ी है।
अमेरिकी ट्रेजरी के फैसले का गोल्ड पर असर
वैश्विक बाजारों में आई इस बड़ी पॉलिसी (policy) शिफ्ट के कारण सोने की कीमतों में 3 महीने की ऊंचाई देखी जा रही है। सोना $4,600 से $4,636 प्रति औंस के बीच कारोबार कर रहा है। इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिकी ट्रेजरी का यह अप्रत्याशित कदम है कि वे लॉन्ग-डेटेड सरकारी बॉन्ड बायबैक को $2 अरब से बढ़ाकर प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 अरब कर रहे हैं।
इस कदम का मकसद बॉन्ड मार्केट को स्थिर करना है, लेकिन इसने बुलियन मार्केट (bullion market) में तुरंत हलचल मचा दी है। बायबैक बढ़ाने से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर दबाव पड़ा है। चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए यह निवेशकों के पैसे के लिए बॉन्ड से मुकाबला करता है; जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो सोना एक आकर्षक विकल्प बन जाता है। साथ ही, इस कदम से अमेरिकी डॉलर भी कमजोर हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया है और मांग और बढ़ी है।
भारतीय फाइनेंस कंपनियों पर असर
सोने की कीमतों में इस तेजी का भारतीय बाजारों पर भी असर पड़ा है, खासकर गोल्ड-लोन देने वाली कंपनियों के लिए। Muthoot Finance, Manappuram Finance, IIFL Finance, और CSB Bank जैसे प्रमुख खिलाड़ियों के शेयरों में सकारात्मक रुझान देखा गया है। इन कंपनियों के लिए, सोने की कीमतों में वृद्धि एक सपोर्टिंग फैक्टर का काम करती है क्योंकि यह लोन के बदले रखे गए कोलैटरल (collateral) का मूल्य बढ़ाती है। इससे कर्जदाताओं को अपने लोन पोर्टफोलियो की सुरक्षा को लेकर भरोसा मिलता है।
'डिबेसमेंट ट्रेड' और जियोपॉलिटिकल रिस्क (Geopolitical Risks)
बॉन्ड मार्केट की तात्कालिक प्रतिक्रिया के अलावा, निवेशक अमेरिकी फिस्कल सस्टेनेबिलिटी (fiscal sustainability) को लेकर चिंताओं के कारण सोने की ओर बढ़ रहे हैं। $40 ट्रिलियन से अधिक के कुल अमेरिकी कर्ज को देखते हुए, कुछ निवेशक करेंसी डिवाल्यूएशन (currency devaluation) के खिलाफ हेज (hedge) के तौर पर सोना खरीद रहे हैं, जिसे 'डिबेसमेंट ट्रेड' कहा जाता है। इसके अलावा, लगातार बने हुए जियोपॉलिटिकल तनाव, खासकर अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर, अनिश्चितता के समय में सोने को एक पसंदीदा सुरक्षित निवेश (safe-haven asset) के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
जोखिम और मार्केट की नजर
हालांकि मौजूदा तेजी सोने के लिए सकारात्मक है, लेकिन निवेशकों को संभावित चुनौतियों से भी अवगत रहना चाहिए। यदि लॉन्ग-एंड ट्रेजरी यील्ड (long-end Treasury yields) फिर से बढ़ने लगती हैं, तो यह सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (non-yielding assets) के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा, लगातार बने हुए फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficits) और मुद्रास्फीति के दबाव की संभावना - खासकर अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं - ब्याज दर की उम्मीदों में अस्थिरता ला सकती हैं।
आगे, बाजार प्रतिभागी आगामी अमेरिकी आर्थिक संकेतकों पर ध्यान केंद्रित करेंगे, विशेष रूप से पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स, जो महंगाई का एक प्रमुख पैमाना है। फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के अधिकारियों के भविष्य की ब्याज दरों के बारे में बयान भी महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि उच्च-दर-लंबी-अवधि (higher-for-longer rates) का कोई भी संकेत सोने के प्रति मौजूदा उत्साह को कम कर सकता है।
