शांति की आहट से सोना चमका, चांदी की मांग घटी
कीमती धातुओं के बाजार में बुधवार को बिलकुल अलग-अलग चाल देखने को मिली। एक तरफ भू-राजनीतिक उम्मीदों के सहारे सोना चढ़ा, तो वहीं दूसरी ओर औद्योगिक उपयोग में आई मंदी के कारण चांदी की कीमतों में गिरावट आई।
शांति समझौते से सोने को सहारा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीदों ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है। इससे महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने के डर को कम किया है। स्पॉट गोल्ड 0.4% बढ़कर $4,499.69 प्रति औंस पर पहुंच गया। इस सेफ-हेवन एसेट को इस उम्मीद का फायदा मिला कि संघर्ष कम होने से ऊर्जा बाजार पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, जून डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 0.2% की मामूली गिरावट आई और यह $4,502.30 पर रहा। घरेलू बाजार की बात करें तो भारत की राजधानी दिल्ली में 99.9% शुद्धता वाले सोने का भाव ₹800 बढ़कर ₹1,63,600 प्रति 10 ग्राम हो गया, जो संभावित राजनयिक प्रगति के प्रति सकारात्मक भावना को दर्शाता है।
औद्योगिक सुस्ती का चांदी पर असर
चांदी की कीमतों में ₹5,000 की गिरावट आई और यह ₹2,71,000 प्रति किलोग्राम पर आ गई। इस तेज गिरावट की वजह औद्योगिक मांग का कमजोर होना और ग्लोबल मार्केट के नकारात्मक संकेत हैं। अनुमान है कि 2026 तक वैश्विक चांदी की मांग में 2% की कमी आएगी, और औद्योगिक मांग में 3% की गिरावट देखी जा सकती है। इसका मुख्य कारण सौर ऊर्जा क्षेत्र से मांग में कमी है। हालांकि चांदी की मांग औद्योगिक गतिविधियों से जुड़ी है, जिसका लगभग 60% हिस्सा सौर पीवी (Solar PV), इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों से आता है, वर्तमान रुझान मंदी की ओर इशारा कर रहे हैं। वर्ल्ड सिल्वर सर्वे 2026 में सप्लाई डेफिसिट (कमी) के कम होने का अनुमान लगाया गया है, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। UBS और HSBC के विश्लेषकों ने चांदी की कीमतों के अनुमान को कम कर दिया है, जिसका कारण फोटोवोल्टिक्स और आभूषणों की मांग में कमी के साथ-साथ खदानों से आपूर्ति में वृद्धि को बताया जा रहा है। HSBC का अनुमान है कि 2026 तक औद्योगिक मांग घटकर 642 मिलियन औंस रह जाएगी।
चांदी की कीमतों में गिरावट के कारण
चांदी की कीमतों में यह गिरावट इसके औद्योगिक उपयोगों के बारे में चिंताएं बढ़ाती है। फोटोवोल्टिक क्षेत्र से मांग में कमी, जिसका एक कारण कच्चे माल की ऊंची लागत और निर्माताओं द्वारा दक्षता में सुधार है, सीधे चांदी की खपत को प्रभावित कर रही है। इसके अलावा, सप्लाई डेफिसिट का कम होना, जो 2025 में अनुमानित 143 मिलियन औंस से घटकर 2026 में 73 मिलियन औंस (HSBC के अनुसार) रह जाएगा, कीमतों में कमजोरी का संकेत देता है। हालांकि कुछ विश्लेषक मौजूदा डेफिसिट के कारण लंबी अवधि के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए हुए हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य औद्योगिक और निवेश मांग में कमी से प्रभावित है। UBS ने अपनी मूल्य भविष्यवाणी को कम कर दिया है और चांदी के ज्यादातर साइडवेज (एक दायरे में) कारोबार करने की उम्मीद जताई है।
सोना और चांदी का भविष्य का अनुमान
भू-राजनीतिक कारकों और संभावित ब्याज दर में कटौती की संभावनाओं के चलते सोने की कीमतों को समर्थन मिलता रह सकता है। हालांकि, निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के मिनट्स से संकेतों पर नजर रखेंगे। दूसरी ओर, चांदी को कमजोर औद्योगिक मांग के अनुमानों और कम होते सप्लाई गैप से चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मॉडलों द्वारा अल्पकालिक उछाल की भविष्यवाणी के बावजूद, औद्योगिक मांग और सप्लाई समायोजन से मिले नकारात्मक संकेत चांदी के निवेशकों के लिए सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं।
