भू-राजनीतिक तनाव में कमी से सोने को मिली बढ़त
25 मार्च 2026 को वैश्विक बाजार में Gold की कीमतों में नरमी का दौर रुका और उनमें तेजी आई। भारत में 24-कैरेट सोने का भाव ₹144,310 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले ₹5,120 अधिक है। इस उछाल की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत थे। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से भी सोने की कीमतों को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला। चांदी की कीमतों में भी इसी तरह का रुख देखा गया, जहां स्पॉट सिल्वर लगभग $73.46 USD/t.oz और फ्यूचर्स $73.983/oz पर कारोबार कर रहे थे।
भारत में इम्पोर्ट ड्यूटी से बड़ा प्राइस गैप
वैश्विक स्तर पर कीमतों में वापसी के बावजूद, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सोने के बाजारों के बीच कीमतों का बड़ा अंतर अभी भी बना हुआ है। 25 मार्च 2026 को भारत में 24-कैरेट सोने का भाव ₹144,310 प्रति 10 ग्राम था, जबकि दुबई में यह लगभग ₹137,682 था। यह भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ₹6,629 या लगभग 4.81% का प्रीमियम है। भारत में सोने पर 6% (5% बेसिक कस्टम्स ड्यूटी और 1% एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस) के अलावा, खरीद पर 3% जीएसटी और मेकिंग चार्जेज़ पर 5% जीएसटी लगता है। इसकी तुलना में, दुबई जैसे टैक्स-फ्री बाजारों में लगभग 5-6% का प्राइस एडवांटेज मिलता है। इससे पहले भारत का इम्पोर्ट ड्यूटी रेट 15% था, जिसे घटाकर 6% किया गया था।
फेड की ब्याज दरें बन रही हैं रोड़ा
गोल्ड की कीमतों का भविष्य वैश्विक मौद्रिक नीति, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के फैसलों से काफी हद तक जुड़ा हुआ है। मार्च 2026 तक, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने अपनी ब्याज दरों को स्थिर रखा है, जो 3.5% से 3.75% के दायरे में बनी हुई हैं। नीति निर्माताओं का अनुमान है कि 2026 के बाकी समय में केवल एक ही रेट कट (ब्याज दर में कटौती) की संभावना है, जो पहले के पूर्वानुमानों के अनुरूप है। ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने (higher-for-longer) का यह माहौल गोल्ड जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों (non-yielding assets) को रखने की लागत बढ़ाता है, जिससे वे कम आकर्षक हो जाती हैं। अमेरिकी महंगाई दर का अनुमान भी ऊंचा बना हुआ है, जिसमें कोर पीसीई (Core PCE) 2026 के लिए 2.7% रहने की उम्मीद है, जो फेड के 2% के लक्ष्य से ऊपर है। इससे यह संकेत मिलता है कि ब्याज दरें फिलहाल ऊंची ही बनी रहेंगी।
रुपये में कमजोरी और महंगाई का दबाव
भारतीय रुपये का गिरता हुआ मूल्य (depreciation) भी निवेशकों के लिए एक चुनौती पेश कर रहा है। 2026 में INR अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 4% और पिछले एक साल में 9.50% कमजोर हुआ है, 25 मार्च 2026 को यह लगभग 93.8650 INR/USD पर कारोबार कर रहा था। इस कमजोर रुपए से इम्पोर्ट किए गए सोने की लागत सीधे तौर पर बढ़ जाती है, जिससे वैश्विक कीमतों के साथ अंतर और बढ़ जाता है। वहीं, भारत बढ़ती महंगाई का सामना कर रहा है, जिसमें सीपीआई (CPI) का अनुमान 2026 में 4.6% और फाइनेंशियल ईयर 2026/27 में 5.1% रहने की संभावना है। इस स्थिति में, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) मुद्रा की कमजोरी और महंगाई को काबू करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने पर विचार कर सकता है, जो घरेलू सोने की कीमतों पर और दबाव डालेगा। आम तौर पर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद सुरक्षित-संपत्ति (safe-haven) की मांग घटने से सोने की कीमतों में गिरावट देखी जाती है।
विश्लेषकों को रेंज-बाउंड ट्रेडिंग की उम्मीद
एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतें भू-राजनीतिक घटनाओं और फेडरल रिजर्व की नीतियों से प्रभावित होकर एक सीमित दायरे (range-bound) में कारोबार करेंगी। इंडसइंड सिक्योरिटीज (IndusInd Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी (Jigar Trivedi) के अनुसार, एमसीएक्स गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स (MCX Gold April futures) ₹141,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को छू सकते हैं। हालांकि प्रमुख बैंकों ने 2026 के अंत तक $6,000–$6,200 प्रति औंस के लॉन्ग-टर्म प्राइस टारगेट दिए हैं, जिसका मुख्य कारण सेंट्रल बैंक की मांग और भू-राजनीतिक अस्थिरता को बताया जा रहा है, लेकिन अल्पावधि में तेजी सीमित रहने की संभावना है। भारत में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में काफी इनफ्लो देखा गया है, जिसमें Nippon India ETF Gold BeES 2026 की शुरुआत में वैश्विक फंड फ्लो के मामले में छठे स्थान पर रहा। निवेशकों को खरीद निर्णय लेने से पहले घरेलू कीमतों, मुद्रा की चाल और अंतरराष्ट्रीय रुझानों पर करीब से नजर रखनी चाहिए।