भारत में सोने के दाम बढ़े; वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिकी डेटा के डर से चांदी गिरी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारत में सोने के दाम बढ़े; वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिकी डेटा के डर से चांदी गिरी
Overview

9 जनवरी 2026 को वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षित-संपत्ति (safe-haven) की मांग के कारण भारत में सोने की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई। वहीं, मुनाफावसूली (profit-booking) और प्रमुख अमेरिकी आर्थिक डेटा जारी होने की प्रत्याशा के कारण चांदी पर बिकवाली का दबाव देखा गया। निवेशक भू-राजनीतिक विकास और कमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग पर नजर रख रहे हैं, जो कीमती धातु बाजारों में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं।

भारत में सोने की कीमतों में वृद्धि

9 जनवरी 2026 को भारत में विभिन्न शुद्धता स्तरों पर सोने की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई। 24K सोने का भाव ₹13,871 प्रति ग्राम तक पहुँच गया, जो पिछले सत्र से ₹71 अधिक था। इसी तरह, 22K सोने में ₹65 की वृद्धि के साथ ₹12,715 प्रति ग्राम और 18K सोने में ₹53 की वृद्धि के साथ ₹10,403 प्रति ग्राम का कारोबार हुआ।

चांदी पर बिकवाली का दबाव

हालांकि, घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों में गिरावट आई। चांदी ₹249 प्रति ग्राम पर कारोबार कर रही थी, जो ₹3 की गिरावट है, जबकि प्रति किलोग्राम कीमतें ₹3,000 घटकर ₹2,49,000 हो गईं। यह गिरावट अंतरराष्ट्रीय चांदी की कीमतों में 5% की महत्वपूर्ण गिरावट के बाद आई है, जिसका श्रेय वार्षिक कमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग की तैयारी को दिया जा रहा है, जो आमतौर पर वायदा बाजारों में भारी बिकवाली का कारण बनता है।

वैश्विक कारक अस्थिरता को बढ़ा रहे हैं

सोना और चांदी दोनों ही अल्पकालिक दबाव से वैश्विक घटनाओं का सामना कर रहे हैं। ऑग्मोंट (Augmont) में अनुसंधान प्रमुख, डॉ. रेनिशा चैननी ने बताया कि सोना $4,500 प्रति औंस के आसपास स्थिर हो रहा है, जबकि चांदी में मुनाफावसूली चल रही है। कमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग और महत्वपूर्ण अमेरिकी आर्थिक डेटा से पहले की सतर्कता इस अस्थिरता के मुख्य चालक हैं।

आर्थिक और भू-राजनीतिक निगरानी

बाजार आगामी अमेरिकी नौकरियों की रिपोर्टों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, जो ब्याज दर की उम्मीदों को प्रभावित कर सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आपातकालीन टैरिफ शक्तियों पर संभावित अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वेनेजुएला से जुड़े तनाव और हाल की अमेरिकी सीनेट चर्चाओं ने बाजार की घबराहट को बढ़ा दिया है। चल रही वार्षिक कमोडिटी इंडेक्स रीबैलेंसिंग प्रक्रिया से भी अल्पावधि में कीमती धातुओं पर दबाव पड़ने की उम्मीद है।

तकनीकी स्तर और निवेशक दृष्टिकोण

डॉ. चैननी ने बताया कि सोने के लिए $4,350 प्रति औंस के पास समर्थन (support) है, और $4,550 पर प्रतिरोध (resistance) है। भारतीय निवेशकों के लिए, ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास समर्थन देखा जा रहा है, और ₹1,40,000 के पास प्रतिरोध है। चांदी अस्थिर बनी हुई है, यदि बिकवाली जारी रहती है तो $70 प्रति औंस तक जा सकती है, जबकि भारतीय समर्थन ₹2,25,000 प्रति किलोग्राम और प्रतिरोध ₹2,60,000 के आसपास है। निवेशकों के लिए, अल्पावधि में सतर्क दृष्टिकोण की सलाह दी जाती है। सोने की सुरक्षित-संपत्ति की अपील वैश्विक अनिश्चितता के दौरान कुछ सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन अल्पावधि में लाभ सीमित हो सकता है। चांदी की उच्च अस्थिरता, इसके औद्योगिक अनुप्रयोगों के कारण, कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का कारण बन सकती है। वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी डेटा और भू-राजनीतिक घटनाओं की बारीकी से निगरानी करना महत्वपूर्ण है।

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