MCX पर Gold के फ्यूचर्स में पिछले हफ्ते **2.2%** की बढ़त दर्ज की गई, जिससे दाम लगभग **₹1.47 लाख** प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए। कमजोर अमेरिकी डॉलर और शॉर्ट-कवरिंग ने कीमतों को सहारा दिया। निवेशक अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और FOMC मीटिंग मिनट्स का इंतज़ार कर रहे हैं, जो ब्याज दरों पर असर डाल सकते हैं।
Gold की रिकवरी के पीछे के कारण
पिछले हफ्ते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर Gold की कीमतों में रिकवरी देखने को मिली, जिससे लगातार चार हफ्तों की गिरावट का सिलसिला टूट गया। August डिलीवरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में ₹3,216 यानी 2.2% की तेज़ी आई और क्लोजिंग ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास हुई। इसी तरह, September डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में 6.2% का उछाल आया और यह ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। घरेलू बाज़ार में यह तेज़ी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप है, जहाँ Comex Gold फ्यूचर्स 2.2% बढ़कर $4,187.30 प्रति औंस पर बंद हुए।
इस तेज़ी की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और शॉर्ट-कवरिंग (short-covering) रही। दरअसल, जिन ट्रेडर्स ने पहले Gold के दाम गिरने पर दांव लगाया था, वे कीमतों में आई गिरावट के बाद अब वापस पोजीशन्स खरीद रहे हैं ताकि मौजूदा स्तर पर मुनाफा बुक कर सकें या नुकसान को कम कर सकें। बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई को लेकर थोड़ी राहत और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता ने भी Gold को सपोर्ट दिया है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी ने भी मांग को मज़बूती दी है। World Gold Council के अनुसार, मई में ग्लोबल केंद्रीय बैंकों ने 41 टन Gold अपने रिजर्व में जोड़ा है, जो इसे वैल्यू स्टोर के रूप में उनकी लगातार रुचि को दर्शाता है।
आगे क्या देखना होगा?
आने वाले दिनों में Gold की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों और 8 जुलाई को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) मीटिंग के मिनट्स पर निर्भर करेगी। निवेशक इन मिनट्स में अमेरिकी सेंट्रल बैंक के अधिकारियों के बीच ब्याज दर नीति को लेकर चल रही चर्चाओं को बारीकी से देखेंगे। इसके अलावा, अमेरिका के सर्विस सेक्टर के प्रदर्शन, ट्रेड डेटा और साप्ताहिक जॉबलेस क्लेम्स जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतक भी बाज़ार के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में Gold $4,000 प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है, लेकिन यह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स और अमेरिकी डॉलर के उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील है। रूस-यूक्रेन जैसे भू-राजनीतिक तनाव भी Gold की मांग के लिए एक सपोर्टिंग फैक्टर बने हुए हैं, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के समय में कीमती धातुओं का रुख करते हैं। अब देखना यह है कि ये आर्थिक आंकड़े Gold की कीमतों में और ज़्यादा अस्थिरता लाते हैं या वर्तमान स्थिरता की पुष्टि करते हैं।
