सोने के वायदा भाव (Gold Futures) में आज जोरदार तेजी देखी गई। अगस्त डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर ₹984 बढ़कर ₹1,44,090 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस उछाल की मुख्य वजह स्पॉट मार्केट की मजबूत मांग और ग्लोबल कीमतों में आई तेजी है।
Detailed Coverage
MCX पर सोने की धूम
सोमवार, 27 जुलाई 2026 को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के वायदा भावों में खास उछाल देखा गया। अगस्त महीने की डिलीवरी वाले सोने के कॉन्ट्रैक्ट में ₹984 की बढ़त दर्ज की गई, जिससे कीमत ₹1,44,090 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गई। मार्केट पार्टिसिपेंट्स की तरफ से हुई एक्टिव बाइंग (active buying) और लोकल फिजिकल मार्केट (local physical markets) में लगातार बनी हुई मांग ने इस तेजी को सहारा दिया।
ग्लोबल मार्केट का असर
घरेलू बाजार में आई यह तेजी अंतरराष्ट्रीय बाजारों के रुझान के अनुरूप है। न्यूयॉर्क में सोने का वायदा भाव 0.86% बढ़कर USD 4,087.69 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। भारत सोने का एक बड़ा इंपोर्टर (importer) है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है। जब ग्लोबल कीमतें ऊपर जाती हैं, तो स्थानीय ट्रेडर्स के लिए इम्पोर्ट कॉस्ट (landed costs) बढ़ जाती है, जिसका असर वायदा बाजार में भी देखने को मिलता है।
कीमत बढ़ने की वजह?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मौजूदा उछाल के पीछे स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग (speculative trading) और खरीदने की मजबूत इच्छाशक्ति का मिलाजुला असर है। वायदा बाजार में, निवेशक अक्सर आगे कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद में नई पोजीशन खोलते हैं। हालांकि, यह शॉर्ट टर्म (short term) में पॉजिटिव सेंटीमेंट (positive sentiment) दिखाता है, लेकिन इन कीमतों का टिकाऊपन कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। खासकर, सोने की ऊंची कीमतें अक्सर ज्वैलरी रिटेलर्स (jewelry retailers) के लिए बिजनेस कम कर देती हैं, क्योंकि ग्राहक या तो कीमत में गिरावट का इंतजार करते हैं या कम मात्रा में खरीदारी करते हैं।
निवेशकों के लिए, सोना अक्सर करेंसी में उतार-चढ़ाव और महंगाई (inflation) के खिलाफ एक हेज (hedge) के तौर पर देखा जाता है। लेकिन, इन ऊंचे दामों पर फिजिकल डिमांड (physical demand) को अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आने वाले कुछ हफ्ते यह तय करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे कि स्पॉट मार्केट (spot market) मांग के इस स्तर को बनाए रख पाता है या नहीं, या फिर ऊंची कीमतों की वजह से खरीदारी में सुस्ती आती है।
आगे क्या देखें?
निवेशक और मार्केट ऑब्जर्वर्स (market observers) संभवतः ग्लोबल सेंट्रल बैंक की पॉलिसियों (global central bank policies) और करेंसी मूवमेंट (currency movements) पर नजर रखेंगे, क्योंकि ये सोने की वैल्यू तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। घरेलू स्तर पर, त्योहारी सीजन (festive season) और शादी-ब्याह के सीजन (wedding season) की मांग यह तय करने में एक अहम फैक्टर होगी कि मौजूदा कीमत का स्तर बना रहता है या मार्केट में कुछ नरमी देखने को मिलती है।
