Gold Price Update: MCX पर सोना भागा, पर असली बाज़ार में फिसला! जानिए क्यों?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Gold Price Update: MCX पर सोना भागा, पर असली बाज़ार में फिसला! जानिए क्यों?
Overview

भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण शुक्रवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर Gold Futures में जोरदार उछाल आया, जहां अप्रैल 2026 का कॉन्ट्रैक्ट **1.64%** बढ़कर **₹1,41,783** प्रति 10 ग्राम तक पहुंचा। इसके विपरीत, भारत के प्रमुख शहरों में फिजिकल गोल्ड की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

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क्यों भागे Gold Futures?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की खबरों ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। शुक्रवार को इस वजह से Multi Commodity Exchange (MCX) पर Gold Futures में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। खासकर, अप्रैल 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में 1.64% की ज़बरदस्त उछाल आई, जिससे यह ₹1,41,783 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करने लगा। जून और अगस्त 2026 के कॉन्ट्रैक्ट्स में भी इसी तरह की तेज़ी देखने को मिली, जो क्रमशः 1.35% और 1.02% बढ़े। वैश्विक अस्थिरता बढ़ने पर निवेशक अक्सर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों (Safe-haven Assets) की ओर रुख करते हैं, और बाज़ार में सट्टेबाजी (Speculative Buying) भी इस तेज़ी की एक बड़ी वजह रही।

फिजिकल गोल्ड की कीमतों में गिरावट क्यों?

Futures Market के इस तेज़ी वाले सेंटिमेंट के बिलकुल विपरीत, देश भर के बड़े शहरों में फिजिकल गोल्ड की कीमतों में गिरावट आई। दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड ₹218 गिरकर ₹14,486 प्रति ग्राम पर आ गया। वहीं, मुंबई और अन्य मेट्रो शहरों में भी इसी तरह का ट्रेंड दिखा। चेन्नई में 24 कैरेट गोल्ड में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जो ₹262 की कमी के साथ ₹14,651 प्रति ग्राम रहा। यह विरोधाभास बताता है कि Futures Trading और लोकल कंज्यूमर डिमांड के बीच फिलहाल अंतर आ गया है। ऐसा तब होता है जब तात्कालिक लिक्विडिटी की ज़रूरतें या लोकल बाज़ार की स्थितियां ग्लोबल सेंटिमेंट पर हावी हो जाती हैं।

आर्थिक कारक भू-राजनीति पर भारी

मार्केट का यह हाल भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk Premium) और व्यापक आर्थिक रुझानों (Economic Trends) का मिला-जुला असर दिखा रहा है। जहां इज़राइल-ईरान का संघर्ष Gold Futures को बढ़ाने का एक सीधा कारण बन रहा है, वहीं अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की मज़बूती (DXY 100.0028 पर) और ट्रेजरी यील्ड्स (Treasury Yields) में बढ़ोतरी जैसी आर्थिक ताकतें गोल्ड जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स के लिए बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि अल्पकालिक गोल्ड कीमतों के रुझान पर आर्थिक कारक, खासकर इंटरेस्ट रेट का आउटलुक और डॉलर की ताकत, भू-राजनीति से ज़्यादा हावी हैं। शुरुआती 2026 की चोटियों से कीमतों में लगभग 14% की गिरावट के बावजूद, ING के एनालिस्ट्स का मानना है कि सिर्फ भू-राजनीति ही नहीं, बल्कि आर्थिक कारक इन मूवमेंट्स को चला रहे हैं। सिल्वर (Silver) की कीमतों में भी भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जो $68.05/t.oz पर ट्रेड कर रहा था और हाल ही में इसमें भारी गिरावट आई थी।

लिक्विडिटी की मांग और डॉलर की ताकत ने बढ़ाई चुनौती

हालांकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण Gold Futures में तुरंत तेज़ी आई, लेकिन गोल्ड के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इक्विटी (Equity) और बॉन्ड (Bond) मार्केट्स में मार्जिन कॉल्स (Margin Calls) को पूरा करने के लिए निवेशकों की एसेट्स को लिक्विडेट (Liquidate) करने की ज़रूरतें गोल्ड के पारंपरिक 'सेफ हेवन' स्टेटस को परख रही हैं। इसके चलते गोल्ड ETFs से आउटफ्लो (Outflow) देखा गया है, जो तात्कालिक रूप से सुरक्षा की धारणा से ज़्यादा लिक्विडिटी को प्राथमिकता देने का संकेत देता है। इसके अलावा, मज़बूत US Dollar और बढ़ती रियल यील्ड्स (Inflation-adjusted Yields) गोल्ड को कम आकर्षक बना रही हैं, क्योंकि नॉन-यील्डिंग एसेट रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है। फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) का आक्रामक रुख, जिसने 2026 के लिए केवल एक रेट कट का अनुमान लगाया है, उच्च यील्ड्स और मज़बूत डॉलर को और बढ़ावा देता है, जो गोल्ड के लिए सीधी चुनौती है। जबकि भू-राजनीतिक घटनाएं सोने को अस्थायी बढ़ावा दे सकती हैं, ऐतिहासिक पैटर्न बताते हैं कि यदि आर्थिक दबाव फिर से हावी हो जाते हैं तो ऐसी रैलियाँ क्षणिक हो सकती हैं। शुरुआती 2026 की ऊंचाई से गोल्ड की कीमतों में काफी सुधार हुआ है, कुछ रिपोर्टों के अनुसार 28 फरवरी के संघर्ष के बाद वैश्विक स्तर पर लगभग 19% का सुधार देखा गया है।

लॉन्ग-टर्म में गोल्ड की स्ट्रेटेजिक वैल्यू

आगे चलकर, एनालिस्ट्स गोल्ड को एक स्ट्रेटेजिक एसेट (Strategic Asset) के रूप में आशावादी बने हुए हैं, खासकर सेंट्रल बैंक्स (Central Banks) और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए। अल्पकालिक चुनौतियों और Futures और Physical मार्केट्स के बीच अंतर के बावजूद, वैल्यू स्टोर (Store of Value) और जोखिम के खिलाफ बचाव (Hedge Against Risk) के रूप में गोल्ड की भूमिका मज़बूत बनी हुई है। लगातार बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता और महंगाई की चिंताएं प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals) की मांग को सपोर्ट करती रहेंगी। J.P. Morgan Global Research का अनुमान है कि 2026 की चौथी तिमाही तक गोल्ड की कीमतें औसतन $5,055/oz हो सकती हैं, और 2027 के अंत तक $5,400/oz तक पहुंच सकती हैं। Wells Fargo का भी लॉन्ग-टर्म आउटलुक बुलिश (Bullish) है, जो 2026 के अंत तक $6,100 से $6,300 प्रति औंस के बीच कीमतें रहने का अनुमान लगा रहा है। यह इस बात का संकेत है कि भले ही अल्पकालिक अस्थिरता बनी रहे, लेकिन आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के खिलाफ एक लॉन्ग-टर्म हेज (Long-term Hedge) के रूप में गोल्ड का फंडामेंटल केस मज़बूत है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.