सोने के वायदा भाव (Gold Futures) आज **₹1.52 लाख** प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गए। इसकी मुख्य वजह भारत में ज़बरदस्त स्पॉट मांग और भू-राजनीतिक तनाव है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में प्रॉफिट-बुकिंग के चलते कीमतें कुछ नरम पड़ी हैं, लेकिन भारतीय बाज़ार में खरीदारी का जोर बना हुआ है। निवेशक अमेरिकी महंगाई आंकड़ों पर भी नज़र रखे हुए हैं, क्योंकि ये ब्याज दरों और कीमती धातुओं की भविष्य की चाल तय कर सकते हैं।
सोने की कीमतों में तूफानी तेजी: क्या है वजह?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सोने के वायदा भावों में गज़ब की तेज़ी देखने को मिली। अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने के फ्यूचर ₹455 बढ़कर ₹1,52,275 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। ट्रेडर्स का मानना है कि भारतीय बाज़ार में फिजिकल डिमांड (Physical Demand) ऐसे ही बनी रहेगी, जिससे भावों को सपोर्ट मिलेगा।
ग्लोबल मार्केट से अलग क्यों भारतीय गोल्ड?
यह गौर करने वाली बात है कि जहाँ भारत में सोने के दाम बढ़ रहे हैं, वहीं अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में ये कुछ फिसले हैं। ग्लोबल गोल्ड फ्यूचर्स लगभग $4,330 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों ने हाल की बढ़त के बाद मुनाफे की बुकिंग (Profit Booking) की है। लेकिन भारत में सोने की कीमतें ग्लोबल ट्रेंड से अलग चल रही हैं, जो यहाँ की स्थानीय वजहों को दर्शाती है।
भू-राजनीतिक तनाव और भारत की मांग का डबल असर
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव भी सोने के दामों को ऊपर ले जा रहा है। जब भी दुनिया में टेंशन बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोना खरीदते हैं, जिससे इसके भावों को सहारा मिलता है। इसके साथ ही, भारत में ज़बरदस्त स्पॉट डिमांड (Spot Demand) भी सोने की कीमतों को गिरने से रोके हुए है।
चांदी में भी दिखी तेजी
सोने के साथ-साथ चांदी के वायदा भावों (Silver Futures) में भी तेज़ी का रुख रहा। MCX पर चांदी ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी, जो कीमती धातुओं में चल रहे पॉजिटिव सेंटीमेंट (Positive Sentiment) का संकेत देता है।
आगे क्या?
निवेशकों की नज़रें अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर टिकी हैं। बाज़ार के जानकारों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) जैसे महंगाई आंकड़ों का इंतज़ार है। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के ब्याज दरों पर फैसले को काफी हद तक प्रभावित कर सकते हैं। अगर महंगाई उम्मीद से ज़्यादा बढ़ती है, तो सोने के बाज़ार पर इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि ब्याज दरों का सीधा संबंध सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) से होता है।
फिलहाल, बाज़ार तेज़ी दिखा रहा है, लेकिन अगर कीमतें एक लेवल पर आकर रुकती हैं, तो मुनाफे की बुकिंग का खतरा बना रहेगा। ऐसे में, भू-राजनीतिक खबरें और आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़े सोने की अगली चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
