3 महीने की गिरावट के बाद ग्लोबल गोल्ड फंड्स में $317 मिलियन का इनफ्लो (inflow) देखा गया है। वहीं, भारतीय इक्विटी फंड्स से इस साल अब तक $9 अरब का आउटफ्लो (outflow) हुआ है। निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम से हटकर अपना फोकस बदल रहे हैं।
गोल्ड फंड्स में लौटी उम्मीद
कई महीनों की गिरावट के बाद ग्लोबल गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) और म्यूचुअल फंड्स में फिर से निवेशकों की रुचि बढ़ी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन फंड्स में $317 मिलियन का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब पिछले तीन महीनों में इन फंड्स से करीब $14 अरब का आउटफ्लो देखा गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि कीमती धातुओं पर बिकवाली का दबाव अब कम हो रहा है, क्योंकि इस साल की शुरुआत में कीमतों में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की थी।
भारतीय फंड्स से निवेशकों का मोहभंग
जहां एक तरफ सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है, वहीं भारतीय इक्विटी फंड्स के लिए स्थिति मुश्किल बनी हुई है। इस साल की शुरुआत से ही इन फंड्स से लगातार पैसा निकाला जा रहा है, जिसका कुल आंकड़ा $9 अरब तक पहुंच गया है। इस आउटफ्लो में $7 अरब लॉन्ग-ओनली फंड्स से और $2 अरब एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) से निकले हैं। चिंता की बात यह है कि मार्च 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच भारतीय लॉन्ग-ओनली फंड्स में आए कुल पैसे का लगभग 60% अब तक निकाला जा चुका है। कुल मिलाकर $12 अरब की निकासी इस बात का संकेत है कि विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार पर भरोसा कुछ कम हुआ है।
बिकवाली का मुख्य कारण
भारत-केंद्रित फंड्स से यह पैसा दुनिया भर के प्रमुख निवेशक केंद्रों से निकला है। सबसे ज्यादा निकासी लक्जमबर्ग से $3.5 अरब हुई, इसके बाद अमेरिका से $2.4 अरब और जापान से $2.1 अरब का पैसा बाहर गया। हालांकि, आयरलैंड में स्थित फंड्स में ज्यादा बड़े बदलाव नहीं देखे गए। यह दिखाता है कि बिकवाली किसी एक देश से नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा की जा रही है।
बदलते ग्लोबल निवेश के रुझान
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश का रुझान भी बदल रहा है। निवेशक अब AI से जुड़े व्यापक निवेश के बजाय चुनिंदा कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं। ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड्स, जिन्हें अक्सर AI सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों में निवेश के लिए इस्तेमाल किया जाता था, पिछले दस हफ्तों से लगातार आउटफ्लो झेल रहे हैं। हालांकि, इन फंड्स से निकासी धीमी होकर $46 मिलियन रह गई है, लेकिन पहले जिस तरह का उत्साह इन फंड्स में देखा गया था, वह अब कम हो गया है। इसके बजाय, निवेशक AI के विकास से सीधे लाभान्वित होने वाली कुछ चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इसके विपरीत, अमेरिकी इक्विटी फंड्स ने शानदार वापसी की है और सिर्फ एक हफ्ते में $27 अरब का इनफ्लो दर्ज किया है, जिससे पिछले दो हफ्तों के नुकसान की भरपाई हो गई। यूरोपीय बाजारों में भी $376 मिलियन का मामूली इनफ्लो देखा गया। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सोने में यह दिलचस्पी बनी रहती है या यह इमर्जिंग मार्केट से व्यापक निकासी का सिर्फ एक अस्थायी ठहराव है। भारत-केंद्रित फंड्स से निकासी की गति जारी रहती है या धीमी पड़ती है, यह जानने के लिए विदेशी संस्थागत निवेश के मासिक आंकड़ों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
