Gold Price Target: J.P. Morgan ने लगाया दांव, साल के अंत तक ₹6,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold Price Target: J.P. Morgan ने लगाया दांव, साल के अंत तक ₹6,000 प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान

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J.P. Morgan ग्लोबल रिसर्च ने सोने की कीमतों में बड़ी तेजी का अनुमान लगाया है। फर्म का मानना है कि 2026 के अंत तक सोना **40%** बढ़कर **$6,000** प्रति औंस तक पहुंच सकता है।

आखिर क्यों है इतनी बड़ी तेजी का अनुमान?

J.P. Morgan ग्लोबल रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, सोना 2026 के अंत तक $6,000 प्रति औंस के स्तर को छू सकता है। यह मौजूदा कीमतों से करीब 40% की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में 2027 के अंत तक $6,300 का टारगेट भी दिया गया है। यह अनुमान इसलिए भी अहम है क्योंकि 2026 की पहली छमाही में सोना काफी सपाट रहा है, जबकि पिछले साल इसने शानदार तेजी दिखाई थी।

ईरान शांति समझौता है मुख्य वजह

इस बुलिश आउटलुक के पीछे एक खास भू-राजनीतिक घटना है: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौता। फिलहाल, सोने का बाजार एनर्जी की कीमतों और अमेरिकी डॉलर से काफी प्रभावित है। अगर 19 जून के आसपास यह शांति समझौता हो जाता है, तो इससे प्रतिबंध हट सकते हैं। ऐसे में ग्लोबल तेल की कीमतें कम हो सकती हैं और अमेरिकी डॉलर भी कमजोर पड़ सकता है। चूँकि सोना डॉलर में ट्रेड होता है, डॉलर के कमजोर होने से यह अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सस्ता हो जाता है, जिससे मांग और कीमत बढ़ती है। साथ ही, तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई को काबू करने में मदद मिलेगी, जिसका असर ब्याज दरों पर भी दिख सकता है।

2026 में क्यों रहा संघर्ष?

2026 में निवेशकों के लिए सोना एक मुश्किल एसेट साबित हुआ है। इसकी मुख्य वजह ऊंची ब्याज दरें रही हैं। जब केंद्रीय बैंक महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखते हैं, तो बॉन्ड और बैंक डिपॉजिट जैसे एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं क्योंकि उन पर ब्याज मिलता है। ऐसे माहौल में सोना, जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता, अपनी अपील खो देता है। इसके अलावा, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पैदा किया है, जिससे एक अप्रत्याशित माहौल बना है और कई निवेशक दूर रहे हैं। फिलहाल, सोना अपने 200-दिन के औसत $4,340 और 50-दिन के औसत $4,730 के बीच एक न्यूट्रल रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो बताता है कि बाजार एक स्पष्ट ट्रेंड का इंतजार कर रहा है।

जोखिमों को समझना

$6,000 का गोल्ड टारगेट एक निश्चितता नहीं है, बल्कि यह भविष्य की खास परिस्थितियों पर आधारित एक अनुमान है। अगर शांति समझौता विफल रहता है, तो बाजार का सेंटीमेंट तेजी से पलट सकता है। इसके अलावा, अगर महंगाई लगातार ऊंची बनी रहती है, तो केंद्रीय बैंकों को उम्मीद से ज्यादा समय तक ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ सकती हैं। इससे सोने पर दबाव बना रहेगा, क्योंकि यह बॉन्ड जैसे ज्यादा यील्ड वाले एसेट्स के साथ प्रतिस्पर्धा करता रहेगा। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भू-राजनीतिक स्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, जिससे कमोडिटी बाजारों में अचानक हलचल हो सकती है।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

सोने के बाजार पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए आने वाले दिन अहम हैं। सबसे महत्वपूर्ण तारीख 19 जून है, जो संभावित शांति समझौते से जुड़ी है। इस बातचीत से जुड़ी कोई भी आधिकारिक खबर बाजार की भावना को प्रभावित करेगी। इसके अलावा, निवेशकों को US Dollar Index और Brent crude oil की कीमतों पर भी कड़ी नजर रखनी चाहिए, क्योंकि संघर्ष से जुड़ी किसी भी खबर पर ये तुरंत प्रतिक्रिया देंगे। अंत में, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर अपडेट पर ध्यान दें, क्योंकि महंगाई को लेकर उनके रुख में कोई भी बदलाव 2026 के बाकी समय में सोने के प्रदर्शन को सीधे प्रभावित कर सकता है।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.