बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने (Gold) में यह गिरावट सिर्फ टेक्निकल चार्ट्स का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई बड़े कारण छिपे हैं। एक तरफ जहां अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) मजबूत हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दुनिया भर के सेंट्रल बैंक्स की ओर से ब्याज दरें (Interest Rates) कम न होने की उम्मीदें सोने जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding Assets) के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। इन फैक्टर्स ने मिलकर सोने के शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर (Short-Term Structure) को बियरिश (Bearish) बना दिया है।
MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स की चाल पर गौर करें तो कीमतें ₹1,54,350 के स्तर के आसपास मंडरा रही हैं, जो कि पिछले कुछ समय से एक अहम सपोर्ट जोन था। लेकिन हालिया बड़ी गिरावट ने इस सपोर्ट को तोड़ दिया है और अब यह लेवल रेजिस्टेंस (Resistance) का काम कर सकता है। ₹1,54,500 का जोन विशेष रूप से एक सप्लाई जोन माना जा रहा है, जहां नीचे की ओर जाती हुई 8 और 21 दिन की एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेजेस (EMAs) भी मिल रही हैं। बोलिंगर बैंड्स (Bollinger Bands) की मिडिल लाइन से नीचे ट्रेड करना और रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) का 42 के आसपास रहना, जो न्यूट्रल 50 मार्क से काफी नीचे है, यह साफ इशारा करता है कि खरीददारों में दम नहीं दिख रहा और कीमतें अभी और गिर सकती हैं। मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) भी नेगेटिव टेरिटरी में बना हुआ है, जो बिकवाली के मोमेंटम (Momentum) के हावी होने का संकेत दे रहा है।
यह टेक्निकल कमजोरी तब आ रही है जब अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से सोने पर दबाव बनाता है। इसके अलावा, प्रमुख सेंट्रल बैंक्स से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कम होने से सोने की महंगाई के खिलाफ हेजिंग (Inflation Hedge) के तौर पर अपील भी घट रही है। पिछले साल इसी समय (फरवरी 2025) के मुकाबले देखें तो, तब के मैक्रो इकोनॉमिक माहौल (Macroeconomic Environment) में सोने ने ज्यादा मजबूती दिखाई थी, क्योंकि तब लिक्विडिटी (Liquidity) ज्यादा थी और ब्याज दरें कम थीं। लेकिन आज का माहौल, जिसमें पॉलिसी मेकर्स सतर्क दिख रहे हैं और डॉलर मजबूत है, सोने के लिए headwinds (चुनौतियां) पैदा कर रहा है।
एक्सपर्ट्स इस स्थिति को देखते हुए फिलहाल 'सेल ऑन राइज' यानी 'बढ़त पर बेचो' की सलाह दे रहे हैं। LKP सिक्योरिटीज जैसे एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना है कि जब तक सोना ₹1,56,500 के लेवल के ऊपर नहीं जाता, तब तक मंदी का रुख बना रहेगा। इस रेजिस्टेंस को पार न कर पाना इस बात का संकेत है कि बाजार ऊंची कीमतों पर बिकवाली का इंतजार कर रहा है। अगर कीमतें ₹1,54,500 के रेजिस्टेंस जोन से नीचे रहती हैं, तो यह बिकवाली और तेज हो सकती है। एनालिस्ट्स ने नीचे की तरफ ₹1,52,000 और ₹1,51,000 के टारगेट दिए हैं। वहीं, ₹1,56,500 के ऊपर एक मजबूत क्लोजिंग को उनके बियरिश सेंटीमेंट (Bearish Sentiment) को तोड़ने वाला माना जाएगा, जिसके बाद शॉर्ट कवरिंग (Short Covering) आ सकती है।
इसका मतलब है कि भले ही सोने में मौजूदा गिरावट तकनीकी लग रही हो, लेकिन इसका रिस्क बड़ा है। ब्याज दरों वाले एसेट्स की तुलना में सोने पर कोई यील्ड (Yield) नहीं मिलता, जिससे ऊंची दरों के माहौल में इसका अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाता है। 'सेल ऑन राइज' की स्ट्रैटेजी यह भरोसा दिखाती है कि ट्रेडर्स मानते हैं कि कीमतें ऊपर जाने पर बिकवाली होगी, जो स्टॉप-लॉस ऑर्डर को ट्रिगर कर सकती है। ₹1,52,000 और ₹1,51,000 के टारगेट यह बताते हैं कि अगर मौजूदा कंसॉलिडेशन (Consolidation) टूटा तो गिरावट तेज हो सकती है। अगर अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत होता रहा या फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने और आक्रामक रुख अपनाया, तो सोने पर दबाव और बढ़ेगा। भू-राजनीतिक स्थिरता (Geopolitical Stability) भी सोने के 'सेफ हेवन' (Safe Haven) स्टेटस को कम कर सकती है। LKP सिक्योरिटीज का ₹1,56,500 के ऊपर स्टॉप-लॉस यह भी बताता है कि वे इस बात को मानते हैं कि अगर यह लेवल टूटा तो उनका शॉर्ट-टर्म व्यू (Short-Term View) गलत साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, MCX पर गोल्ड फ्यूचर्स का शॉर्ट-टर्म आउटलुक (Short-Term Outlook) ₹1,54,500 के नीचे कमजोर बना हुआ है। किसी भी बड़े बदलाव के लिए ₹1,56,500 के लेवल पर नजर रखनी होगी, जिसके ऊपर जाने पर ही ट्रेंड रिवर्सल (Trend Reversal) के संकेत मिलेंगे। बाजार के सेंटिमेंट (Sentiment) में किसी भी बदलाव, जैसे सेंट्रल बैंक की पॉलिसी या भू-राजनीतिक घटनाओं (Geopolitical Events) पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी, जो सोने की चाल बदल सकते हैं।