गोल्ड अब 'रिस्क-सेंसिटिव एसेट' क्यों?
गोल्ड मंगलवार को $4,550 के स्तर के ऊपर लौटा, जो सोमवार को एक महीने के निचले स्तर को छूने के बाद की रिकवरी है। यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 0.8% बढ़कर $4,568.50 पर बंद हुए, जबकि स्पॉट गोल्ड भी करीब 0.8% की तेजी के साथ $4,557.56 के आसपास ट्रेड कर रहा था।
हाल की बिकवाली को डॉलर की मजबूती और रियल यील्ड्स (Real Yields) में बढ़ोतरी से जोड़कर देखा जा रहा था। लेकिन अब एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड अपने पुराने 'सेफ-हेवन' स्टेटस से हटकर 'रिस्क-सेंसिटिव एसेट' की तरह बर्ताव कर रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि नए जमाने के इनवेस्टर्स और लिवरेज्ड ट्रेडर्स (Leveraged Traders) मार्केट में किसी भी बड़ी हलचल के दौरान अपने होल्डिंग्स बेचने में हिचकिचाते नहीं हैं। पहले जहां गोल्ड और शेयर मार्केट का रिश्ता अलग था, वहीं अब स्ट्रेस के दौरान ये ज्यादा कोरिलेटेड देखे जा रहे हैं, जिससे मार्केट में बड़ी गिरावट गोल्ड प्राइसेज को भी प्रभावित करती है।
मध्य-पूर्व के टेंशन या इकोनॉमिक डेटा? क्या चला रहा गोल्ड को?
गोल्ड की इस छोटी सी रिकवरी का इमीडिएट कारण मध्य-पूर्व में सीजफायर की नाजुक उम्मीदें और क्रूड ऑयल की कीमतों में आई नरमी बताई जा रही है। मध्य-पूर्व के टेंशन और इनके कारण ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई (Inflation) बढ़ने की चिंता थी, लेकिन अब गोल्ड पर इनका असर इकोनॉमिक फैक्टर्स से कम ही लग रहा है। ऑयल की कीमतों में प्रॉफिट-टेकिंग से महंगाई का तत्काल दबाव थोड़ा कम हुआ है, जिसने गोल्ड को सपोर्ट दिया है।
हालांकि, ओवरऑल इकोनॉमिक सिचुएशन काफी मुश्किल बनी हुई है। लगातार महंगाई की चिंताएं और बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी (रियल यील्ड्स करीब 2.0%) गोल्ड को महंगा बना रही हैं, क्योंकि अब इंटरेस्ट-बेयरिंग एसेट्स ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं। यूएस डॉलर की मजबूती भी एक बड़ा रोल प्ले कर रही है, क्योंकि मजबूत डॉलर के कारण डॉलर-डिनॉमिनेटेड गोल्ड इंटरनेशनल बायर्स के लिए महंगा हो जाता है, जिससे डिमांड कम होती है।
फेड की पॉलिसी पर सबकी नज़र: जॉब्स डेटा और महंगाई का प्रेशर
इनवेस्टर्स की नजर अब आने वाले यूएस जॉब्स रिपोर्ट जैसे बड़े इकोनॉमिक डेटा पर टिकी है। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) के अगले कदम तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। एक्सपर्ट्स 'स्टैगफ्लेशन' (Stagflation) के संकेतों को बारीकी से देख रहे हैं। अगर जॉब ग्रोथ कमजोर रहती है और महंगाई बढ़ी रहती है, तो फेड एक मुश्किल स्थिति में फंस सकता है। महंगाई के कारण रेट कट न कर पाने और लेबर मार्केट के सिकुड़ने के कारण रेट बढ़ाने में हिचकिचाहट, ये सब गोल्ड के लिए बड़ी फैक्टर बन सकते हैं।
आमतौर पर, मजबूत जॉब्स डेटा गोल्ड प्राइसेज को नीचे लाता है, क्योंकि यह इकोनॉमिक मजबूती, डॉलर की तेजी और इंटरेस्ट-बेयरिंग एसेट्स की तरफ इनफ्लो का संकेत देता है। इसके उलट, कमजोर जॉब्स डेटा अनिश्चितता के बीच इनवेस्टर्स को सेफ-हेवन की तलाश में गोल्ड की ओर धकेलता है। मार्केट फेडरल रिजर्व के इन डेटा पॉइंट्स की व्याख्या पर करीब से नजर रख रहा है, क्योंकि उनकी पॉलिसी शिफ्ट्स गोल्ड के लिए बड़े ड्राइवर साबित होती हैं। मई 2026 के मध्य में फेडरल रिजर्व नेतृत्व में संभावित बदलाव की अनिश्चितता भी गोल्ड की प्राइसिंग में रिस्क प्रीमियम जोड़ रही है।
दूसरे कीमती धातुएं गोल्ड से आगे, पर आउटलुक अभी भी बुलिश
अगर 2025 की बात करें, तो गोल्ड की परफॉर्मेंस अच्छी रही थी, जिसमें कीमतें करीब 65% बढ़ीं। हालांकि, सिल्वर (Silver) जैसे अन्य कीमती धातुओं ने इससे भी कहीं ज्यादा छलांग लगाई। सिल्वर 149.1%, प्लैटिनम (Platinum) 121.8% और पैलेडियम (Palladium) 72.4% बढ़े।
हालांकि, गोल्ड के लिए मीडियम-टर्म आउटलुक अभी भी बुलिश (Bullish) बना हुआ है। फेड की संभावित ईजिंग, सेंट्रल बैंक की खरीद और ग्लोबल डेट की समस्याओं से इसे सपोर्ट मिलेगा। वहीं, सिल्वर को इंडस्ट्रियल डिमांड, खासकर सोलर और ईवी सेक्टर से, का फायदा मिल सकता है। प्लैटिनम को अंडरवैल्यूड माना जा रहा है और यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी से लाभान्वित हो सकता है। पैलेडियम एक वोलेटाइल एसेट बना हुआ है, जो सप्लाई की कमी और ऑटोमोटिव सेक्टर के ट्रांजिशन से प्रभावित है। बड़े बैंक 2026 के अंत तक गोल्ड के लिए बुलिश फोरकास्ट बनाए हुए हैं। जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) ने सेंट्रल बैंक और इनवेस्टर्स की लगातार स्ट्रक्चरल डिमांड के चलते $6,300 प्रति औंस का अनुमान लगाया है।
नियर-टर्म रिस्क: गोल्ड एक 'रिस्क एसेट' के तौर पर
लॉन्ग-टर्म सपोर्ट के बावजूद, गोल्ड को नियर-टर्म में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो इसे थोड़ा कॉशियस बना रही हैं। एक रिस्क एसेट के तौर पर, गोल्ड अब मार्केट में बड़े स्ट्रेस के दौरान लिवरेज्ड प्लेयर्स द्वारा की जाने वाली बिकवाली का शिकार हो सकता है। हाई रियल यील्ड्स और डॉलर की मजबूती गोल्ड की डिमांड को सीमित कर रही हैं। ऐतिहासिक रूप से, जियोपॉलिटिकल रिस्क शॉर्ट-टर्म स्पाइक्स का कारण बन सकते हैं, लेकिन ये अक्सर फीके पड़ जाते हैं क्योंकि इकोनॉमिक फंडामेंटल्स ज्यादा मायने रखते हैं। मध्य-पूर्व के टेंशन का ऑयल प्राइसेज पर असर, जो इन्फ्लेशन के लिए एक फैक्टर है, गोल्ड को चलाने में फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी और यूएस इकोनॉमिक डेटा की तुलना में कम प्रभावी लग रहा है। नतीजतन, गोल्ड साइडवेज ट्रेड कर सकता है, जिसमें प्राइस स्विंग्स जियोपॉलिटिकल इवेंट्स के बजाय पॉलिसी सिग्नल्स और इकोनॉमिक डेटा से तय होंगे।
गोल्ड प्राइसेज का अगला कदम क्या होगा?
आगे चलकर, गोल्ड की दिशा सेंट्रल बैंक की पॉलिसी, इन्फ्लेशन डेटा और लेबर मार्केट के ट्रेंड्स पर निर्भर करेगी। सेंट्रल बैंक की स्ट्रक्चरल डिमांड और ईटीएफ इनफ्लो (ETF Inflows) एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं, लेकिन नियर-टर्म प्राइस एक्शन इकोनॉमिक डेटा रिलीज और फेड के बयानों के प्रति बेहद सेंसिटिव रहेगा। एनालिस्ट्स लॉन्ग-टर्म के लिए बड़े पैमाने पर ऑप्टिमिस्टिक बने हुए हैं, अगर फेड पॉलिसी ईज करता है और इंस्टीट्यूशनल बाइंग जारी रहती है तो 2026 के अंत तक नए हाईज़ का अनुमान है। हालांकि, नियर-टर्म आउटलुक कॉशियस है, क्योंकि इकोनॉमिक डेटा और इंटरेस्ट रेट की उम्मीदें जियोपॉलिटिकल खबरों पर भारी पड़ने की संभावना है।
