बुधवार को कीमती धातुओं में मिला-जुला रुझान देखने को मिला है। MCX पर Gold की कीमतें ऊपर चढ़ी हैं, जबकि Silver में बिकवाली का दबाव साफ दिख रहा है। बाजार अब अमेरिकी इकोनॉमिक आंकड़ों पर टकटकी लगाए हुए है।
बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कीमती धातुओं के कारोबार में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,48,500 प्रति 10 ग्राम के आसपास मजबूती के साथ ट्रेड कर रहा है। इसके विपरीत, चांदी (Silver) की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है, जहाँ भाव ₹2,19,000 प्रति किलोग्राम के स्तर के करीब देखे गए।
चांदी में क्यों है बिकवाली का दबाव?
चांदी में आई यह गिरावट केवल मार्केट के सेंटीमेंट का असर नहीं है, बल्कि इसके पीछे खास तकनीकी कारण हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चांदी में 8.74% का ओपन इंटरेस्ट बढ़ा है, जो साफ इशारा करता है कि ट्रेडर्स आक्रामक रूप से 'शॉर्ट पोजीशन' बना रहे हैं। यह एक ऐसा दांव है जिसमें इन्वेस्टर को तभी फायदा होता है जब दाम नीचे गिरते हैं। इससे साफ है कि मार्केट पार्टिसिपेंट्स को चांदी में फिलहाल और कमजोरी की आशंका है।
Gold के लिए अहम लेवल्स
सोने ने फिलहाल अपनी मजबूती बनाए रखी है, लेकिन बाजार की नजरें इसके क्रिटिकल लेवल्स पर हैं। MCX पर सोने के लिए ₹1,49,535 पर एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने के लिए दमदार खरीदारी की जरूरत होगी। वहीं, गिरावट आने पर ₹1,47,820 का लेवल सपोर्ट का काम करेगा। ग्लोबल मार्केट में गोल्ड $4,190 प्रति औंस और सिल्वर $59.50 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा है।
अमेरिकी आंकड़ों का असर
निवेशक अभी अमेरिका से आने वाले कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) का इंतजार कर रहे हैं। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भविष्य की दिशा तय करेंगे। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी या डॉलर के मजबूत होने का असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है। सोने की तरह सिल्वर सिर्फ एक वैल्यू स्टोर नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग में भी होता है। इसलिए, अगर ग्लोबल इकोनॉमी सुस्त पड़ती है, तो औद्योगिक मांग घटने से चांदी पर और दबाव बन सकता है।
