मंगलवार को सोने की कीमतों में नरमी देखी गई, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित शांति समझौते की खबरों ने सुरक्षित निवेश की मांग को कम कर दिया। वहीं, भारत के लिए एक बड़ी खबर यह है कि मई 2026 में देश का चांदी का आयात **87%** गिर गया, जिसका मुख्य कारण सख्त नए आयात नियम और बढ़े हुए टैक्स हैं।
शांति की आहट से सोने की चमक हुई फीकी
हाल के उछाल के बाद, सोने की कीमतों में आज थोड़ी गिरावट आई। इसकी वजह पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम शांति समझौते की उम्मीद है। इस समझौते का उद्देश्य महीनों के तनाव को खत्म करना और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने से निवेशक पारंपरिक तौर पर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों (safe-haven assets) से दूरी बना रहे हैं। सिटी (Citi) के विश्लेषकों ने भले ही तीन महीने के लिए सोने का पूर्वानुमान $4,500 प्रति औंस तक बढ़ा दिया हो, लेकिन फिलहाल बाजार की प्रतिक्रिया उम्मीदों के उलट है।
भारत में चांदी के आयात में भारी गिरावट
वहीं, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। मई 2026 में भारत का चांदी का आयात पिछले साल के $566.22 मिलियन की तुलना में 87% घटकर केवल $75.57 मिलियन रह गया। यह इस साल की शुरुआत के बाद चांदी के आयात की सबसे निचली स्तर है। यह गिरावट स्थानीय मांग में कमी के कारण नहीं, बल्कि सरकारी उपायों के कारण आई है।
कड़े आयात नियम और टैक्स का असर
सरकार ने मई महीने में चांदी के आयात को नियंत्रित करने के लिए कई कड़े कदम उठाए। चांदी के दाने और पाउडर को 'प्रतिबंधित श्रेणी' (restricted category) में डाल दिया गया है, जिसके तहत आयात के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) को बचाने और व्यापार घाटे (trade deficit) को कम करने के लिए चांदी और सोने पर आयात शुल्क (import duties) को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया गया है। इन नियामक बाधाओं के कारण आयातकों के लिए चांदी देश में लाना काफी मुश्किल हो गया है।
आगे क्या देखें?
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की नीतियों पर है। 16-17 जून को होने वाली बैठक नई चेयरपर्सन केविन वॉर्श (Kevin Warsh) की पहली बैठक होगी। बाजार यह जानने के लिए उत्सुक है कि ब्याज दरों (interest rates) पर फेड का रुख क्या रहेगा। इसके अलावा, अमेरिका-ईरान शांति समझौते की स्थिरता पर भी नजर रखी जाएगी, क्योंकि इसमें कोई भी नया तनाव सोने की सुरक्षित मांग को फिर से बढ़ा सकता है। घरेलू बाजार में, चांदी के आयात पर लगे प्रतिबंधों का स्थानीय कीमतों और उद्योगों पर असर देखना महत्वपूर्ण होगा।
