'सेफ हेवन' की बदलती तस्वीर?
यह रिकॉर्ड $12 अरब की निकासी दिखाती है कि निवेशक अब सोने को मार्केट की उथल-पुथल के समय एक मुख्य सुरक्षित संपत्ति (Safe Asset) के तौर पर कम देख रहे हैं। सबसे ज्यादा फंड उत्तरी अमेरिका से निकले, जहाँ बढ़ती बॉन्ड यील्ड, मजबूत होते अमेरिकी डॉलर और ओवरऑल जोखिम से बचने की चाहत ने निवेशकों को गोल्ड फंड्स से बाहर निकाला। यूरोप के निवेशकों ने भी अपनी होल्डिंग कम की, जिसका कारण गिरती गोल्ड की कीमतें और ऊंची ब्याज दरें रहीं। यह सोने की उस पुरानी भूमिका से बिल्कुल अलग है जहाँ इसे हमेशा मुश्किल वक्त का सहारा माना जाता था। मार्च 2025 के मुकाबले इस साल की निकासी काफी ज्यादा गंभीर थी, जो मैक्रोइकोनॉमिक बदलावों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता को दर्शाती है।
एशिया में दिखा उलट ट्रेंड
पश्चिमी बाजारों के बिल्कुल विपरीत, एशियाई निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में मजबूत मांग जारी रखी। चीन और भारत इस मामले में सबसे आगे रहे। स्थानीय शेयर बाजारों (Equity Markets) में कमजोरी और करेंसी के दबाव (Currency Pressures) के कारण एशियाई निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में थे। यह दिखाता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में आर्थिक उम्मीदें और जोखिम प्रबंधन की रणनीतियाँ कितनी अलग हैं।
अन्य कीमती धातुओं का हाल
कीमती धातुओं में यह दबाव एक जैसा नहीं था। सिल्वर ईटीएफ (Silver ETFs) से थोड़ी कम निकासी हुई, जो इस सफेद धातु के लिए थोड़ी मजबूत, लेकिन फिर भी नकारात्मक भावना को दर्शाती है। वहीं, प्लैटिनम ईटीएफ (Platinum ETFs) में मामूली निवेश बढ़ा, जो शायद औद्योगिक मांग या विशिष्ट सप्लाई मुद्दों से जुड़ा हो। गोल्ड माइनर ईटीएफ (Gold Miner ETFs) सोने की कीमतों में गिरावट के साथ गिरे, लेकिन ऑपरेटिंग कॉस्ट (Operational Cost) के दबाव के कारण इन्हें और भी ज्यादा गिरावट का सामना करना पड़ा। मार्च 2026 के दौरान अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index - DXY) में काफी मजबूती आई, जिसने सोने जैसी डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटीज (Dollar-denominated Commodities) पर दबाव बनाया। VIX इंडेक्स भी ऊंचा बना रहा, जो मार्केट में अनिश्चितता का संकेत देता है, लेकिन इस अनिश्चितता ने सोने जैसी पारंपरिक 'सेफ हेवन' की मांग को बढ़ाने के बजाय यील्ड देने वाली संपत्तियों (Yield-bearing Assets) की ओर निवेशकों को धकेला।
'सेफ हेवन' के दावे पर संकट
एशिया से आ रहा समर्थन कुछ राहत दे रहा है, लेकिन पश्चिमी बाजारों से हुई रिकॉर्ड निकासी सोने के निर्विवाद 'सेफ हेवन' के दर्जे के लिए एक बड़ी चुनौती है। मौजूदा माहौल में बढ़ती रियल यील्ड (Real Yields) और मजबूत डॉलर सीधे तौर पर सोने के आकर्षण को टक्कर दे रहे हैं। विश्लेषक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि जब महंगाई कम होती दिख रही हो या सेंट्रल बैंक मौद्रिक नीति को कड़ा कर रहे हों, तो सोना कितना प्रभावी हेज (Hedge) साबित होगा। कुछ विश्लेषणों से यह भी पता चलता है कि सोने का इक्विटी के साथ कोरिलेशन (Correlation) बढ़ रहा है, जिससे इसके डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के फायदे कम हो रहे हैं। अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती, जो आर्थिक प्रदर्शन और ऊंची ब्याज दरों से प्रेरित है, सोने जैसी डॉलर-कीमत वाली संपत्तियों में विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर रही है। प्रमुख गोल्ड ईटीएफ प्रोवाइडर्स को लगातार रिडेम्पशन रिक्वेस्ट (Redemption Requests) मिल रही हैं, और अगर मैक्रोइकोनॉमिक हालात ऐसे ही बने रहे तो यह ट्रेंड और तेज हो सकता है। पश्चिमी पोर्टफोलियो में सोने की घटती अपील, अटकलों से परे इसकी दीर्घकालिक मांग पर सवाल खड़े करती है। अगर एशिया में करेंसी का दबाव कम हुआ या स्थानीय बाजार स्थिर हुए, तो सोने में आने वाले निवेश का मुख्य सहारा कम हो सकता है, जिससे कीमतों पर और दबाव आ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐतिहासिक रूप से सोने ने महंगाई के खिलाफ हेज का काम किया है, लेकिन 2026 की शुरुआत में इसका प्रदर्शन बताता है कि यह कोरिलेशन कमजोर पड़ रहा है, खासकर जब सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई से लड़ रहे हैं।
आगे क्या?
विश्लेषकों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ लोग बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों (Geopolitical Risks) और सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने में जारी डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) के चलते संभावित तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, कुछ को ऊंची ब्याज दरों और मजबूत डॉलर से लगातार दबाव बने रहने का अनुमान है, जिससे ईटीएफ से और निकासी हो सकती है। बाजार इस बात पर बारीकी से नजर रखेगा कि क्या क्षेत्रीय रुझान अलग-अलग बने रहते हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की मौद्रिक नीति, जो उच्च यील्ड का पक्ष लेती है, सोने को ब्याज-युक्त संपत्तियों की तुलना में कितना आकर्षक बनाती है। गोल्ड माइनर ईटीएफ का प्रदर्शन भी कीमती धातु क्षेत्र के सेंटिमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक होगा।