कीमती धातुओं में बड़ा उलटफेर
फरवरी 2026 की शुरुआत में कीमती धातुओं ने अपने हालिया उछाल के बाद बाजार में एक बड़ी रिकवरी देखी है. 10 फरवरी 2026 को मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल 2026 के गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) ₹1,57,825 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए, जो दिन के लिए 0.15% की मामूली गिरावट थी. वहीं, मार्च 2026 के सिल्वर फ्यूचर्स (Silver Futures) ₹2,59,548 प्रति किलोग्राम पर बंद हुए, जो दिन के लिए 1.17% नीचे थे. जनवरी के अपने सबसे ऊंचे स्तरों से, चांदी के दाम करीब 35-37% गिरे हैं, जबकि सोने में लगभग 10-18% की करेक्शन आई है.
गोल्ड ईटीएफ: इनफ्लो का महासागर
हालिया गिरावट के बावजूद, जनवरी 2026 में गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (Gold ETFs) में निवेशकों का विश्वास मजबूत बना रहा. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में गोल्ड ईटीएफ में ₹24,039.96 करोड़ का नेट इनफ्लो आया, जो दिसंबर 2025 के ₹11,647 करोड़ के इनफ्लो से काफी ज्यादा है. इस भारी निवेश के चलते 31 जनवरी 2026 तक गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) रिकॉर्ड ₹1,84,276.96 करोड़ पर पहुंच गया. यह लगातार मांग सोने की सुरक्षित निवेश की भूमिका को दर्शाती है, जो भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, जैसे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव, और वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर चिंताओं से प्रेरित है. सेंट्रल बैंकों द्वारा सोने के भंडार में वृद्धि भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है.
चांदी की वोलेटिलिटी और ईटीएफ का डिस्काउंट
चांदी की चाल काफी अलग रही है. 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में कीमतों में आए जबरदस्त उछाल के बाद, इस धातु में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. चांदी ईटीएफ (Silver ETFs) में आई गिरावट का एक कारण यह भी है कि रैली के चरम पर ये फंड्स अपनी नेट एसेट वैल्यू (NAV) से 14-16% तक प्रीमियम पर चल रहे थे, जो कि पैसिव फंड्स के लिए टिकाऊ नहीं था. नतीजतन, 10 फरवरी 2026 तक, कई चांदी ईटीएफ अपनी संबंधित एनएवी (NAV) से औसतन 5% से 7% के डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहे थे, जो बाजार की बढ़ती सावधानी को दर्शाता है.
अलग-अलग वजहें और रिस्क प्रोफाइल
सोने और चांदी के बीच का यह अंतर अलग-अलग बाजार चालकों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को दिखाता है. ऐतिहासिक रूप से, आर्थिक अनिश्चितता और डॉलर के कमजोर होने पर सोना चांदी से बेहतर प्रदर्शन करता है, जो पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने का काम करता है. वहीं, चांदी, जो सोलर एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों की मांग से जुड़ा है, अधिक अस्थिरता (Volatility) दिखाता है. गोल्ड-सिल्वर रेशियो (Gold-Silver Ratio), जो चांदी के सोने से बेहतर प्रदर्शन करने पर काफी संकुचित हो गया था, बाजार की भावनाओं में बदलाव के साथ समायोजित हो रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि जहां चांदी की मजबूत औद्योगिक मांग आगे चलकर अच्छी वापसी की संभावना जगाती है, वहीं इसके दाम में बड़ी गिरावट का खतरा बना रहता है, जो इसे ज्यादा वोलेटिलिटी झेल सकने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त बनाता है. इसके विपरीत, सोना अपनी स्थिरता और पोर्टफोलियो को विविधता देने वाले एसेट के तौर पर अधिक पसंद किया जा रहा है.
आगे का रास्ता
आगे की ओर देखते हुए, विश्लेषक कीमती धातुओं को लेकर सतर्कता के साथ आशावादी बने हुए हैं, लेकिन सोने और चांदी पर अलग-अलग नजरिया रखते हैं. लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य सोने की सुरक्षित निवेश की अपील को बनाए रखने की उम्मीद है. चांदी के मामले में, जहां औद्योगिक मांग इसे आधार प्रदान करती है, वहीं इसकी कीमतों का प्रदर्शन आर्थिक चक्रों और व्यापक बाजार की भावना के प्रति संवेदनशील रहने की संभावना है. विशेषज्ञों का जोर अनुशासित निवेश पर है, वे सुझाव देते हैं कि अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव का पीछा करने के बजाय, व्यवस्थित तरीके से निवेश करें और वांछित संपत्ति आवंटन बनाए रखें. गोल्ड ईटीएफ में बड़ा इनफ्लो इसे पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को रेखांकित करता है, जबकि चांदी की वर्तमान अस्थिरता समझदार निवेशकों के लिए एक अधिक सट्टा, पर संभावित रूप से फायदेमंद अवसर प्रस्तुत करती है.