कीमतों में नरमी, फिर भी निवेश की बहार?
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने-चांदी के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स (Futures Contracts) की कीमतें नीचे आ रही हैं। MCX पर अप्रैल 2026 के गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,60,694 प्रति किलोग्राम पर थे, जो 0.28% गिरे। वहीं, मार्च 2026 के सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,65,500 प्रति 30 किलोग्राम पर थे, जिनमें 1.05% की गिरावट आई। विदेशों में भी COMEX गोल्ड $5,215.4 प्रति औंस पर 0.21% नीचे था, और COMEX सिल्वर $89.360 पर 1.79% लुढ़का। ये कीमतें बताती हैं कि बाज़ारों में एक नरमी का माहौल है।
ईटीएफ में रिकॉर्ड निवेश का अंबार
लेकिन, इस गिरावट के बावजूद भारतीय निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में पैसों का रिकॉर्ड अंबार लगा दिया है। जनवरी 2026 में ही गोल्ड ईटीएफ में करीब ₹25,000 करोड़ (या US$2.5 बिलियन) का भारी निवेश हुआ। यह पहली बार है जब गोल्ड ईटीएफ में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा पैसा आया है। जुलाई के बाद से गोल्ड ईटीएफ में 900% से ज्यादा का ज़बरदस्त उछाल देखा गया है, जबकि इसी दौरान इक्विटी फंड्स से ₹17,000 करोड़ बाहर निकल गए हैं।
'सेफ हेवन' की तलाश क्यों?
इस 'फ्लाइट टू सेफ्टी' के पीछे मुख्य वजहें हैं दुनिया भर में बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं (Geopolitical Uncertainties) और लगातार बनी हुई महंगाई की चिंताएं। ऐसे समय में निवेशक सोने को मूल्य का एक सुरक्षित भंडार (Store of Value) मानते हैं, जो अनिश्चितता के दौर में उनके पैसे की सुरक्षा कर सके।
एक्सपर्ट्स की बुलिश राय
इस बीच, एक्सपर्ट्स की राय सोने के लिए काफी बुलिश (Bullish) है। उनका मानना है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और महंगाई की चिंताएं सोने की मांग को बढ़ाएंगी। भले ही फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने ब्याज दरों को स्थिर रखा है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी रेपो रेट (Repo Rate) बढ़ाया नहीं है, पर महंगाई पर लगाम लगना अभी बाकी है। यही वजह है कि सोने को एक बेहतरीन 'इंफ्लेशन हेज' (Inflation Hedge) माना जा रहा है। J.P. Morgan जैसे बड़े ब्रोकरेज हाउस का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोना $6,300 प्रति औंस तक पहुँच सकता है। Goldman Sachs और Wells Fargo भी सोने की कीमतों में मजबूती देखकर इसे $5,400-$6,300 के दायरे में कारोबार करते हुए देख रहे हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही गोल्ड की खरीद और ईटीएफ में हो रहा भारी निवेश इस तेजी को और बल दे रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
हालांकि सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) ने हाल के दिनों में ज्यादा प्रतिशत लाभ दिया है, पर यह ज्यादा वोलेटाइल (Volatile) होता है क्योंकि इसका इस्तेमाल इंडस्ट्री में भी होता है। सोने को अभी भी एक स्थिर मूल्य भंडार माना जाता है।
कुछ चुनौतियां भी हैं। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है या महंगाई तेजी से गिरती है, तो सोने की मांग पर असर पड़ सकता है। अगर इक्विटी मार्केट में बड़ी तेजी आती है, तो पैसा सोने से निकलकर शेयरों में जा सकता है।
लेकिन कुल मिलाकर, भू-राजनीतिक जोखिम, केंद्रीय बैंकों की खरीद और ईटीएफ में निवेशकों का लगातार रुझान यह बता रहा है कि सोने की कीमतें आने वाले समय में ऊपर जा सकती हैं। आने वाले समय में यह नए रिकॉर्ड स्तर को छू सकता है।