Gold ETFs में गिरावट: निवेशकों को क्यों देखना चाहिए लॉन्ग-टर्म चार्ट?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Gold ETFs में गिरावट: निवेशकों को क्यों देखना चाहिए लॉन्ग-टर्म चार्ट?

भारतीय बाज़ार में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) निवेशकों के लिए पिछले महीने की परफॉर्मेंस थोड़ी निराशाजनक रही। मिरे एसेट (Mirae Asset) और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल (ICICI Pru) जैसे प्रमुख गोल्ड ईटीएफ फंड्स में पिछले एक महीने में **8.3%** की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म में यह उतार-चढ़ाव दिख रहा है, लेकिन लॉन्ग-टर्म के रिकॉर्ड्स बताते हैं कि कहानी कुछ और है।

क्या हुआ -

जून 2026 में, भारत के कई बड़े गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) ने एक महीने में -8.3% का रिटर्न दिया। इस ग्रुप में मिरे एसेट गोल्ड ईटीएफ, डीएसपी गोल्ड ईटीएफ और आईसीआईसीआई प्रू गोल्ड ईटीएफ जैसे फंड्स शामिल हैं, जो ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा का मैनेजमेंट कर रहे हैं। यह गिरावट तब आई है जब इसी दौरान सोने के बड़े बेंचमार्क की कीमतें लगभग स्थिर थीं। निवेशकों के लिए, यह फंड के रिटर्न और उसके द्वारा ट्रैक किए जाने वाले सोने की कीमत के बीच एक बड़ा अंतर पैदा करता है।

परफॉर्मेंस गैप को समझना -

जब कोई गोल्ड ईटीएफ सोने की बेंचमार्क कीमत स्थिर रहने के बावजूद नेगेटिव रिटर्न दिखाता है, तो यह अक्सर ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) और मार्केट की कीमत की अस्थिरता का नतीजा होता है। एक गोल्ड ईटीएफ को फिजिकल गोल्ड की घरेलू कीमत को फॉलो करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। लेकिन, स्टॉक एक्सचेंज पर दिखने वाली कीमत सप्लाई और डिमांड से तय होती है, जो कभी-कभी फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) से अलग हो सकती है। अगर ईटीएफ अपनी NAV के मुकाबले डिस्काउंट पर ट्रेड कर रहा है, या लिक्विडिटी (Liquidity) कम है, तो रिपोर्ट किया गया रिटर्न सोने की असली कीमत से काफी अलग हो सकता है।

लॉन्ग-टर्म क्यों ज़्यादा ज़रूरी है -

निवेशकों के लिए यह ज़रूरी है कि वे सिर्फ एक महीने के आंकड़ों से आगे देखें। ऐतिहासिक परफॉर्मेंस बताती है कि सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला फंड समय-सीमा के आधार पर बदल सकता है। उदाहरण के लिए, जहाँ कुछ फंड्स पिछले महीने संघर्ष कर रहे थे, वहीं दूसरों ने एक साल और तीन साल की अवधि में बेहतर रिटर्न दिखाया है। आदित्य बिड़ला एसएल गोल्ड ईटीएफ (Aditya Birla SL Gold ETF) ने छह महीने और एक साल के समय में अलग-अलग परफॉर्मेंस पैटर्न दिखाए हैं। इसी तरह, तीन साल की अवधि में आईसीआईसीआई प्रू गोल्ड ईटीएफ (ICICI Pru Gold ETF) ने अपनी लीडिंग पोजीशन बनाए रखी है।

गोल्ड ईटीएफ का मूल्यांकन कैसे करें -

गोल्ड ईटीएफ चुनते या उसकी समीक्षा करते समय, निवेशकों को सिर्फ पिछले महीने के रिटर्न के बजाय तीन मुख्य बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  1. ट्रैकिंग एरर (Tracking Error): यह फंड के रिटर्न और बेंचमार्क के रिटर्न के बीच का अंतर है। कम ट्रैकिंग एरर का मतलब है कि फंड सोने की कीमत को बेहतर ढंग से फॉलो कर रहा है।
  2. एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio): यह फंड द्वारा सोने को मैनेज करने के लिए लिया जाने वाला शुल्क है। चूंकि गोल्ड ईटीएफ पैसिव इंस्ट्रूमेंट्स हैं, इसलिए कम एक्सपेंस रेशियो आम तौर पर बेहतर होता है क्योंकि यह सीधे आपके फाइनल रिटर्न को प्रभावित करता है।
  3. लिक्विडिटी (Liquidity): स्टॉक एक्सचेंज पर दैनिक ट्रेडिंग वॉल्यूम (Daily Trading Volume) की जाँच करें। उच्च लिक्विडिटी सुनिश्चित करती है कि आप अपने यूनिट्स को सोने के वास्तविक मूल्य के करीब की कीमतों पर आसानी से खरीद या बेच सकें।

आगे क्या देखना है -

निवेशकों को इन फंड्स की कंसिस्टेंसी (Consistency) को लंबी अवधि, जैसे एक से तीन साल, में मॉनिटर करना चाहिए। यदि कोई फंड लंबी अवधि में बेंचमार्क या अपने साथियों से लगातार पीछे रहता है, तो यह जांचना उचित हो सकता है कि क्या उसका एक्सपेंस रेशियो बहुत अधिक है या क्या उसका ट्रैकिंग एरर लगातार प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ज़्यादा है। हमेशा नवीनतम NAV और एक्सचेंज पर वर्तमान बाज़ार मूल्य की जाँच करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आप सोने के वास्तविक मूल्य पर महत्वपूर्ण प्रीमियम पर खरीदारी नहीं कर रहे हैं।

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