ग्लोबल इन्वेस्टर्स ने पिछले हफ्ते Gold ETFs में **$1.91 बिलियन** का निवेश किया है, जो कि लगातार 13वें हफ्ते जारी निवेश का सिलसिला है। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका के बावजूद सोने की मांग बनी हुई है।
सुरक्षित निवेश की दौड़
दुनिया भर के निवेशकों के लिए सोना इस समय सबसे भरोसेमंद सहारा बना हुआ है। पिछले एक हफ्ते में ही Gold ETFs में $1.91 बिलियन का शुद्ध निवेश (net inflow) देखा गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि मौजूदा अनिश्चितता के दौर में निवेशक रिस्क लेने के बजाय सोने में पैसा लगाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
क्यों है सोने पर दबाव?
आमतौर पर जब अमेरिका में सरकारी बॉन्ड यील्ड 5.1% के पार हो, तो सोने की कीमतों का बढ़ना मुश्किल होता है। चूंकि सोना कोई इंटरेस्ट नहीं देता, इसलिए निवेशक उन एसेट्स को प्राथमिकता देते हैं जहां ब्याज से कमाई हो सके। इसके अलावा, बाजार में दिसंबर में US फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की 90% संभावना जताई जा रही है, जो सोने की कीमतों पर दबाव बना रही है।
भारत में त्योहारी सीजन का असर
भारतीय बाजार के लिए यह ट्रेंड काफी अहम है क्योंकि जल्द ही धनतेरस और दिवाली का सीजन आ रहा है। फिजिकल गोल्ड की खरीदारी के अलावा, अब भारतीय निवेशक Gold ETFs को ज्यादा महत्व दे रहे हैं, क्योंकि इसमें लिक्विडिटी ज्यादा है और शुद्धता की गारंटी भी मिलती है।
आगे क्या रखें ध्यान?
निवेशकों को अब अमेरिका के जॉब डेटा और महंगाई के आंकड़ों पर बारीक नजर रखनी होगी। यदि वहां की इकोनॉमी मजबूत बनी रहती है, तो फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है, जिससे सोने की चाल पर असर पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव सोने को सपोर्ट दे सकते हैं।
