दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी को लेकर उम्मीदों के बीच निवेशक सुरक्षित माने जाने वाले सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में लगातार चौथे हफ्ते नेट इनफ्लो (निवेश) दर्ज किया गया है।
क्यों बढ़ रहा है सोने में निवेश?
दुनिया भर में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के माहौल में निवेशक अब सोने को एक सुरक्षित ठिकाना मान रहे हैं। इसी वजह से गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में लगातार चौथे सप्ताह भारी निवेश देखा गया है। अगस्त के शुरुआती हफ्तों में यह ट्रेंड खास तौर पर देखने को मिला है।
$4,400 के आसपास कीमतें
पिछले कुछ हफ्तों से सोने की कीमतें लगभग $4,400 प्रति औंस के आसपास बनी हुई हैं। बाज़ार की नाजुक स्थिति और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद सोने की यह मजबूती निवेशकों का भरोसा दिखाती है। इसमें सबसे बड़ा कारण हॉरमज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बढ़ता तनाव और अमेरिका व ईरान के बीच जारी टकराव है। ऐसे समय में सोना एक मूल्यवान संपत्ति के रूप में उभरता है।
फेड की पॉलिसी का असर
गोल्ड ईटीएफ में बढ़ते निवेश के बीच अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की नीतियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं। अगर ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने जैसी संपत्ति को होल्ड करने की अवसर लागत (Opportunity Cost) भी बढ़ जाती है, क्योंकि इनसे कोई ब्याज या डिविडेंड (Dividend) नहीं मिलता। निवेशक अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, जैसे कि इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (Industrial Production) के आंकड़ों और FOMC मीटिंग के मिनट्स पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं। इसके अलावा, जैक्सन होल सिम्पोजियम (Jackson Hole Symposium) में फेड चेयरमैन केविन वार्श (Kevin Warsh) के भाषण से पॉलिसी दिशा को लेकर स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
एशियाई बाज़ारों का योगदान
साल दर साल आधार पर देखें तो भारत और चीन जैसे एशियाई देशों ने ग्लोबल इनफ्लो (Global Inflow) में बड़ा योगदान दिया है। भारतीय निवेशकों के लिए, डॉलर के मुकाबले रुपये की घटती कीमत भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। जब रुपया कमजोर होता है, तो आयातित सोने की लागत बढ़ जाती है, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अलग स्थानीय रुझानों को प्रभावित कर सकती है।
आगे क्या?
फिलहाल, बाज़ार दो विपरीत शक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है: सुरक्षित संपत्तियों की मांग और संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी का दबाव। अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो सोने की कीमतों में नरमी आ सकती है। वहीं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े, जैसे कि रोज़गार या मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट, निवेशकों को सोने की होल्डिंग कम करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए, ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा और भू-राजनीतिक खबरों के बीच का तालमेल ही मुख्य निगरानी का विषय रहेगा। ईटीएफ में लगातार निवेश इस समय सकारात्मक संकेत दे रहा है, लेकिन इसका भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि फेडरल रिजर्व नरमी का संकेत देता है या वैश्विक अनिश्चितताएं बढ़ती रहती हैं।
