ग्लोबल गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में लगातार तीसरे हफ्ते नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है। हाल की अवधि में कुल मिलाकर **$3 बिलियन** से अधिक का निवेश आया है। यह लगातार दिलचस्पी कमजोर अमेरिकी लेबर मार्केट रिपोर्ट के बाद निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है। जहां पश्चिमी बाजारों में मिले-जुले रुझान दिख रहे हैं, वहीं भारतीय और चीनी निवेशक पीले धातु की मांग के प्रमुख चालक बने हुए हैं।
गोल्ड-ईटीएफ (Gold-ETF) लगातार निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं, और लगातार तीन हफ्तों से इनमें पॉजिटिव नेट इनफ्लो देखा जा रहा है। यह रुझान निवेशकों के बढ़ते विश्वास को दिखाता है, क्योंकि जिन फंड्स में पहले आउटफ्लो हो रहा था, अब उनमें नई दिलचस्पी दिख रही है। सोने की कीमतों में हालिया उछाल, जो हाल ही में $4,340 प्रति औंस के आसपास मंडरा रही हैं, वैश्विक ब्याज दरों पर बदलते विचारों के कारण आई है, जिसने इस ताजा निवेश को बढ़ावा दिया है।
निवेशकों का बदलता नज़रिया
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश का तरीका बदल गया है। पहले, सोने की कीमतों पर भू-राजनीतिक संघर्षों का बड़ा प्रभाव पड़ता था। हालांकि, मौजूदा बाजार डेटा बताता है कि निवेशक अब मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटर्स, विशेष रूप से महंगाई, रियल इंटरेस्ट रेट्स और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। अमेरिका में नॉन-फार्म पेरोल (US Nonfarm Payrolls) की उम्मीद से कमजोर रिपोर्ट ने सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक रेट हाइक जारी रखने की उम्मीदों को कम कर दिया है। जब ब्याज दरें कम रहने या स्थिर रहने की उम्मीद होती है, तो सोना जैसी नॉन-यील्डिंग एसेट्स (non-yielding assets) निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाती हैं।
क्षेत्रीय रुझान और प्रमुख खरीदार
क्षेत्रीय रुझानों में वैश्विक बाजारों के व्यवहार में एक स्पष्ट अंतर दिख रहा है। साल-दर-तारीख (Year-to-date), पश्चिमी और एशियाई निवेशकों के बीच एक बड़ा अंतर रहा है। जहां कुछ पश्चिमी बाजारों में नेट रिडेम्पशन (net redemptions) दर्ज किए गए, वहीं चीन और भारत के निवेशकों ने लगातार खरीदारी की है, जिससे इस साल कुल इनफ्लो में अरबों का योगदान मिला है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों ने गोल्ड मार्केट का समर्थन जारी रखा है, 2026 की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड-उच्च खरीदारी गतिविधि देखी गई है, जो सोने के लिए एक मजबूत सपोर्ट फ्लोर प्रदान करती है।
आगे का रास्ता और जोखिम
इस सकारात्मक रुझान के बावजूद, सोने का आउटलुक आने वाले आर्थिक आंकड़ों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले हफ्तों में निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु आगामी अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (US CPI) रिपोर्ट और फेडरल रिजर्व की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान होगा। यदि महंगाई के आंकड़े उम्मीद से अधिक निकलते हैं, तो केंद्रीय बैंक एक सख्त नीतिगत रुख बनाए रख सकता है, जो सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकता है और मौजूदा इनफ्लो मोमेंटम को धीमा कर सकता है।
बाजार सहभागियों को प्रॉफिट-टेकिंग (profit-taking) की संभावना से भी अवगत रहना चाहिए। जैसे-जैसे सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंचती हैं, कुछ निवेशक लाभ को लॉक करने के लिए बेचने का विकल्प चुन सकते हैं, खासकर यदि मौजूदा आर्थिक अनिश्चितता कम हो जाती है। इन इनफ्लो की स्थिरता इस बात पर बहुत अधिक निर्भर करेगी कि मैक्रो-इकॉनॉमिक वातावरण सोने को एक सुरक्षित-संपत्ति (safe-haven asset) के रूप में समर्थन देना जारी रखता है या नहीं।
