त्योहारी सीजन के चलते गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में नई निवेश एंट्री पर रोक के बाद भी गोल्ड ETFs में चमक बरकरार है। सितंबर में इन ETFs में **₹4,450 करोड़** का भारी निवेश दर्ज किया गया है, जबकि ये शेयर बाजार में सामान्य रूप से ट्रेड कर रहे हैं।
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में Gold ETFs की कीमतों में बढ़त देखने को मिली। निवेशकों का रुझान साफ बता रहा है कि वे म्यूचअल फंड हाउस द्वारा गोल्ड फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में निवेश को लेकर किए गए बदलावों से बेफिक्र हैं। हालांकि 16 अक्टूबर, 2026 से चुनिंदा FoFs में लम्पसम और SIP निवेश पर रोक लगा दी गई है, लेकिन गोल्ड ETFs पहले की तरह स्टॉक एक्सचेंज पर बिना किसी रुकावट के ट्रेड हो रहे हैं।
क्यों लगाई गई रोक?
एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) का यह कदम त्योहारों के दौरान सोने की फिजिकल मांग को नियंत्रित करने के लिए है। भारत सोने का बड़ा आयातक है, ऐसे में निवेश के जरिए आने वाली अत्यधिक मांग से रुपये पर दबाव बन सकता है। इस तरलता (Liquidity) को मैनेज करने के लिए फंड हाउस ने यह रणनीतिक फैसला लिया है।
आंकड़ों में समझें निवेशकों का जोश
Association of Mutual Funds in India (AMFI) के डेटा के अनुसार, सितंबर 2026 में गोल्ड ETFs को ₹4,450.61 करोड़ का नेट इनफ्लो मिला है, जो अगस्त के ₹2,596.7 करोड़ के मुकाबले काफी अधिक है। साल 2026 के पहले नौ महीनों में कुल इनफ्लो ₹45,925 करोड़ के पार पहुंच गया है, जो पूरे 2025 के आंकड़ों को पीछे छोड़ चुका है।
Gold ETFs बनाम Gold FoFs: क्या है अंतर?
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि गोल्ड ETFs सीधे शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं, जिसका मतलब है रियल-टाइम प्राइसिंग और बेहतर लिक्विडिटी। वहीं, Gold FoFs एक म्यूचअल फंड स्कीम है जो अंततः ETF में ही निवेश करती है, लेकिन इसमें डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं होती। यही कारण है कि फंड मैनेजमेंट संबंधी पाबंदियां अक्सर FoFs पर लागू होती हैं, न कि ETFs पर।
भविष्य में गोल्ड के दाम वैश्विक bullion ट्रेंड्स, ब्याज दरों और जियो-पॉलिटिकल हालातों पर निर्भर करेंगे। बाजार के जानकारों का मानना है कि इन पाबंदियों के बावजूद गोल्ड एसेट क्लास के प्रति निवेशकों का उत्साह बना रहेगा।
