गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में पिछले 3 महीनों में **2.3%** की गिरावट देखी गई है। Mirae Asset, DSP और Aditya Birla SL जैसे बड़े फंड्स इस दौर से गुजरे हैं। हालांकि, एक साल और तीन साल जैसे लंबे समय के चार्ट को देखें तो इन फंड्स ने दमदार रिटर्न दिया है। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव पर ध्यान देने के बजाय लंबी अवधि के प्रदर्शन को देखना चाहिए।
3 महीने में क्यों गिरी Gold ETF की चाल?
भारतीय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) के हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले तीन महीनों में इनमें गिरावट आई है। 6 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, Mirae Asset Gold ETF, DSP Gold ETF और Aditya Birla SL Gold ETF जैसे कई बड़े फंड्स में 2.3% की गिरावट दर्ज की गई है। ये फंड्स निवेशकों से भारी भरकम पैसा जुटाते हैं, कुछ फंड्स का असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,500 करोड़ से भी ज्यादा है।
समय के साथ बदलती परफॉर्मेंस
यह समझना जरूरी है कि गोल्ड ईटीएफ का प्रदर्शन समय के साथ काफी बदल सकता है। भले ही पिछले तीन महीनों में गिरावट दिखी हो, लेकिन लंबे समय के आंकड़े एक अलग कहानी कहते हैं। उदाहरण के लिए, Mirae Asset Gold ETF ने पिछले एक साल और तीन सालों में अपने बेंचमार्क से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। एक साल में इसने 37.8% और तीन साल में 32.3% का आउटपरफॉर्मेंस दिखाया है। इससे पता चलता है कि सोने की कीमतों में छोटी अवधि के उतार-चढ़ाव, लंबी अवधि में संपत्ति बनाने या जोखिम कम करने की क्षमता को नहीं दर्शाते।
रैंकिंग बदलती क्यों है?
अलग-अलग फंड्स की रैंकिंग इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितने समय के प्रदर्शन को देख रहे हैं। जहां Mirae Asset Gold ETF तीन महीने के प्रदर्शन में आगे था, वहीं Aditya Birla SL Gold ETF ने दूसरे समयावधि में अपनी ताकत दिखाई है। Aditya Birla फंड ने छह महीने में 6.1% और पिछले एक साल में 48.2% का शानदार रिटर्न दिया है। तीन साल के नजरिए से भी इसने 34.1% रिटर्न के साथ इस कैटेगरी को लीड किया है। कमोडिटी से जुड़े निवेशों में ऐसा उतार-चढ़ाव आम है, क्योंकि सोने की कीमतों पर ग्लोबल फैक्टर्स जैसे सेंट्रल बैंक की नीतियां, डॉलर के मुकाबले करेंसी की चाल और अंतरराष्ट्रीय मांग का असर पड़ता है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि वे सिर्फ तिमाही नतीजों पर ध्यान न दें। गोल्ड ईटीएफ का मुख्य मकसद फिजिकल गोल्ड को पेपर के रूप में रखना है, जो घरेलू सोने की कीमत को ट्रैक करते हैं। ऐसे फंड्स का विश्लेषण करते समय, निवेशक 'ट्रैकिंग एरर' (फंड और असल सोने की कीमत के रिटर्न का अंतर) और 'एक्सपेंस रेशियो' (नेट रिटर्न पर असर डालने वाला खर्च) पर ध्यान दे सकते हैं। चूंकि सोना अक्सर बाजार की अस्थिरता से बचाव के लिए इस्तेमाल होता है, इसलिए कमोडिटी बाजारों के चक्र का हिस्सा होने के नाते छोटी अवधि के नुकसान भी लगे रहते हैं। आगे चलकर ग्लोबल गोल्ड स्पॉट प्राइस और घरेलू इंपोर्ट ड्यूटी में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी होगी, क्योंकि ये ही इन ईटीएफ्स के असली मूल्य को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं।
