गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में निवेश करने वालों के लिए जुलाई 2026 तक की अवधि में थोड़ी निराशाजनक खबर है। ज्यादातर बड़े गोल्ड ईटीएफ फंड्स ने पिछले तीन महीनों में निगेटिव रिटर्न दिया है। Mirae Asset Gold ETF इस कैटेगरी में सबसे पीछे रहा, जिसका रिटर्न -4.6% रहा। हालांकि, कुछ फंड्स ने एक साल में 44.1% तक का शानदार रिटर्न भी दिया है।
Detailed Coverage
गोल्ड ईटीएफ का हालिया प्रदर्शन
जुलाई 2026 के अंत तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) का शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस थोड़ा कमजोर रहा है। इस कैटेगरी के ज्यादातर प्रमुख फंड्स ने पिछले तीन महीनों में निगेटिव रिटर्न दर्ज किया है। Mirae Asset Gold ETF ने -4.6% का रिटर्न दिया, जो कि ₹1,500 करोड़ से अधिक एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स में सबसे अच्छा प्रदर्शन था। वहीं, DSP Gold ETF और Aditya Birla SL (ABSL) Gold ETF जैसे फंड्स का रिटर्न -4.7% रहा।
लंबी अवधि में तस्वीर बदली
हालांकि, जब हम लंबी अवधि के प्रदर्शन को देखते हैं, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। गोल्ड ईटीएफ आमतौर पर फिजिकल गोल्ड की घरेलू कीमत को ट्रैक करते हैं। इनके प्रदर्शन पर ग्लोबल गोल्ड प्राइस और भारतीय रुपये के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की चाल का असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, Aditya Birla SL Gold ETF ने एक साल में 44.1% का शानदार रिटर्न दिया है। यह दर्शाता है कि लंबी अवधि में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव देखे जा सकते हैं, जो शॉर्ट-टर्म के आंकड़ों से काफी अलग हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशक इन फंड्स का मूल्यांकन करते समय यह देखते हैं कि फंड अपने बेंचमार्क को कितनी सटीकता से ट्रैक करता है। Mirae Asset Gold ETF ने एक और तीन साल में अपने बेंचमार्क की तुलना में प्रदर्शन में एक मजबूत अंतर दिखाया है, जो कम ट्रैकिंग एरर (tracking error) या एक्सपेंस रेशियो (expense ratio) में अंतर का संकेत देता है। तीन साल के प्रदर्शन में ICICI Pru Gold ETF सबसे आगे रहा, जिसने 33.0% का रिटर्न दिया।
निवेश का नजरिया
इन ईटीएफ के बीच चयन करते समय, निवेशकों को यह समझना चाहिए कि इनका लक्ष्य सोने की कीमत को मात देना नहीं, बल्कि लागत घटाने के बाद उसे यथासंभव बारीकी से ट्रैक करना है। फंड का एक्सपेंस रेशियो, स्टॉक एक्सचेंज पर लिक्विडिटी (liquidity), और यह सोने की कीमत को कितनी सटीकता से फॉलो करता है, ये कुछ महत्वपूर्ण कारक हैं। चूंकि ये फंड कमोडिटी (commodity) से जुड़े हैं, इसलिए इनमें सोने की कीमत में अस्थिरता का अंतर्निहित जोखिम भी होता है, जो वैश्विक मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ब्याज दर के रुझानों पर निर्भर करता है। निवेशक अपने चुने हुए फंड के एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर पर नजर रख सकते हैं ताकि यह समझ सकें कि सोने की कीमत में हुई बढ़त का कितना हिस्सा वास्तव में उन्हें मिल रहा है।
